हरीश राणा के परिवार को यूपी सरकार देगी 10 लाख की आर्थिक मदद, घर चलाने दुकान देने का भी किया ऐलान
DM मांदड़ ने बताया कि पालन-पोषण के लिए राज्य सरकार ने इस परिवार को रोजगार हेतु एक दुकान देने का निर्णय भी लिया है और इसके लिए उन्हें गाजियाबाद विकास प्राधिकरण या नगर निगम में किसी एक द्वारा बनाई गई दुकान का विकल्प दिया जाएगा।

भारत में पहली बार इच्छा मृत्यु की अनुमति पाने वाले गाजियाबाद के हरीश राणा के परिवार की आर्थिक सहायता करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार आगे आई है। राज्य सरकार ने हरीश के परिवार को 10 लाख रुपए की वित्तीय मदद करन की स्वीकृत दी है। इस बात की जानकारी गाजियाबाद के डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ ने गुरुवार को हरीश के परिवार से मुलाकात करने के बाद दी। मांदड़ ने बताया कि पिछले 13 साल में बेटे का इलाज कराने परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई है, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने इस परिवार के लिए 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत कर दी है।
इसके साथ ही मांदड़ ने बताया कि परिवार के पालन-पोषण के लिए राज्य सरकार ने इस परिवार को रोजगार हेतु एक दुकान देने का निर्णय भी लिया है और इसके लिए उन्हें गाजियाबाद विकास प्राधिकरण या नगर निगम में किसी एक द्वारा बनाई गई दुकान का विकल्प दिया जाएगा।
डीएम बोले- आगे भी करेंगे परिवार की मदद
डीएम ने आगे बताया कि हरीश राणा के इलाज में अबतक जो भी दवाईयों का खर्च आया है, उसका वहन सीएम ऑफिस द्वारा वहन किया जा रहा था और हमारी पूरी कोशिश है कि दुख की इस घड़ी में परिवार को संबल प्रदान करें और भविष्य में भी परिवार को यदि किसी सहायता की आवश्यकता होगी तो वह भी निश्चित रूप से की जाएगी।
पिछले 12 साल से चेतन शून्य अवस्था में हैं हरीश
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद में रहने वाले 32 साल के हरीश राणा को बुधवार को इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी। एक इमारत से गिरने के बाद से हरीश पिछले 12 वर्षों से चेतना-शून्य अवस्था में हैं। मस्तिष्क की चोट के कारण सभी अंग पूरी तरह लकवाग्रस्त हो गये थे और वह 'परसिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट' (पीवीएस) की स्थिति में चले गये थे।
सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु की इजाजत
जिसके बाद अदालत ने उसे जीवन रक्षक प्रणाली हटाकर 'पैसिव यूथेनेशिया' (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति दे दी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने एक दिन पहले यह फैसला सुनाया, जो न्यायालय के 2018 के 'कॉमन कॉज' निर्णय (जिसे 2023 में संशोधित किया गया था) पर आधारित है, जिसमें गरिमा के साथ मरने को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई थी।
12 साल से हालत में नहीं हुआ कोई सुधार
मेडिकल रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। वह केवल सर्जरी के माध्यम से लगाए गए पीईजी ट्यूबों द्वारा दिए जाने वाले चिकित्सकीय पोषण के सहारे जीवित हैं। पीठ ने पिता की ओर से दायर उन आवेदनों पर यह आदेश पारित किया, जिसमें उन्होंने अपने बेटे को लगाये गये सभी जीवन रक्षक उपकरणों को हटाने की मांग की थी।
'कोई माता-पिता बेटे को इस हालत में नहीं देखना चाहेंगे'
उच्चतम न्यायालय द्वारा 'इच्छा मृत्यु' की इजाजत दिए जाने के बाद गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा के पिता अशोक ने कहा कि कोई भी माता-पिता अपने बेटे को ऐसी हालत में नहीं देखना चाहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने 12 साल से ज्यादा समय से कोमा में जीवन-रक्षक प्रणाली (वेंटिलेटर) के सहारे सांस ले रहे हरीश राणा को वेंटिलेटर से हटाकर 'इच्छा मृत्यु' की अनुमति दे दी।




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