ugc rules nsui and abvp also raises its voice know their demands यूजीसी नियमों पर NSUI की एक और डिमांड, ABVP ने भी बुलंद की आवाज; किसने क्या कहा?, Ncr Hindi News - Hindustan
More

यूजीसी नियमों पर NSUI की एक और डिमांड, ABVP ने भी बुलंद की आवाज; किसने क्या कहा?

एनएसयूआई ने यूजीसी के नए नियमों को और प्रभावी बनाने की मांग की है। समितियों में पारदर्शिता के लिए न्यायाधीशों को भी शामिल किया जाना चाहिए। वहीं एबीवीपी ने यूजीसी से नियमों को लेकर पैदा हो रही भ्रांतियां दूर करने को कहा है।

Tue, 27 Jan 2026 08:21 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, अभिनव उपाध्याय, नई दिल्ली
share
यूजीसी नियमों पर NSUI की एक और डिमांड, ABVP ने भी बुलंद की आवाज; किसने क्या कहा?

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए यूजीसी के नए नियमों का स्वागत किया है लेकिन इसे और प्रभावी बनाने की मांग की है। NSUI का कहना है कि भेदभाव विरोधी समिति केवल कागजी नहीं होनी चाहिए वरन इसमें एससीए एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों और शिक्षकों का अनिवार्य प्रतिनिधित्व होना चाहिए। इसमें न्यायाधीशों को शामिल किया जाना चाहिए। वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) यूजीसी के नए नियमों में स्पष्टता की कमी पर चिंता जताई है।

कागजी कमेटी नहीं होनी चाहिए

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने यूजीसी के नए नियमों का स्वागत करते हुए इसे शिक्षा संस्थानों में फैले भेदभाव को खत्म करने के लिए एक जरूरी कदम बताया है। हालांकि NSUI ने यह भी साफ किया है कि इन नियमों के लिए बनने वाली कमेटी सिर्फ दिखावा या कागजी बनकर नहीं रहनी चाहिए।

रिटायर न्यायाधीशों को शामिल करने की मांग

एनएसयूआई का कहना है कि समिति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होना चाहिए। इसके साथ ही इन वर्गों के शिक्षकों को भी समिति में शामिल करना जरूरी है। NSUI ने समिति की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए इसमें कार्यरत या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को शामिल करने की मांग भी की है। संगठन ने आरोप लगाया कि मौजूदा यूजीसी नियम समिति की संरचना को लेकर मौन है।

खत्म हो जाएगा न्याय का मकसद

NSUI का आरोप है कि यूजीसी के मौजूदा नियम समिति के नेतृत्व और बनावट के बारे में स्पष्ट नहीं हैं। इससे डर है कि यह समिति विश्वविद्यालय प्रशासन के हाथ की कठपुतली बन सकती है। ऐसी स्थिति में समानता और न्याय का उद्देश्य खत्म हो जाएगा। NSUI ने पुराने अनुभवों का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी कई समितियां, खासकर भेदभाव से जुड़ी समितियां, केवल दिखावा साबित हुईं। वे पीड़ितों को न्याय दिला सकीं।

तय हो दोषियों की जवाबदेही

एनएसयूआई ने कहा कि आरक्षण नीतियों के ठीक से लागू नहीं होने और एनएफएस के कारण एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। यूजीसी एक स्वतंत्र और शक्तिशाली समिति बनाए जो जमीनी स्तर पर काम करे और दोषियों की जवाबदेही तय करे। एनएसयूआई ने यह भी कहा है कि वह विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति, लिंग या किसी भी आधार पर होने वाले भेदभाव के खिलाफ मजबूती से खड़ा है।

हर छात्र को समान अधिकार मिलें

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने उक्त नियमों में स्पष्टता और संतुलन की जरूरत है। यूजीसी और सभी संस्थानों को लोकतंत्र की भावना का सम्मान करना चाहिए ताकि हर छात्र को समान अधिकार मिलें। एबीवीपी का लक्ष्य भारत को भेदभाव से मुक्त और समानता पर आधारित बनाना है। एबीवीपी हमेशा से कैंपस में सकारात्मक माहौल बनाने और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए काम करती रही है।

पैदा हो रहीं भ्रांतियां

एबीवीपी ने कहा है कि इस विनियम के कुछ प्रावधानों को लेकर विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच जो अस्पष्टता और भ्रांतियां पैदा हो रही हैं। ऐसे में यूजीसी को त्वरित संज्ञान लेते हुए तत्काल इन भ्रांतियों को दूर करनी चाहिए। चूंकि यह विषय न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए एबीवीपी का मानना है कि यूजीसी को इस संदर्भ में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए न्यायालय में शीघ्र हलफनामा दाखिल करना चाहिए।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:हिमाचल में बर्फबारी से बिगड़े हालात; लाहौल-स्पीति में स्कूल बंद, कल कैसा मौसम?
ये भी पढ़ें:राजस्थान में गिरे ओले; दो की मौत, इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट, आगे भी 2 दिन बारिश
ये भी पढ़ें:गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं पर रोक का इस इमाम ने किया समर्थन, दी तगड़ी दलील

भेदभावों के लिए कोई जगह नहीं

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि परिसरों में सभी वर्गों के लिए समानता होनी चाहिए। परिसरों में भेदभावों के लिए कोई जगह नहीं हैं। इस विनियम को लेकर भ्रांतियां हैं, जिन पर यूजीसी को संवाद करते हुए संबंधित भ्रांतियों को दूर करने के लिए तत्काल स्पष्टीकरण देना चाहिए। सभी विद्यार्थियों के लिए भेदभाव-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए समाज के सभी वर्गों के सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।

दूर की जाएं भ्रांतियां

वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि यूजीसी की ओर से जारी अधिसूचना 'विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026' का उद्देश्य महत्वपूर्ण है लेकिन इसके कुछ उपबंधों में स्पष्टता और संतुलन जरूरी है। कुछ उपबंधों की शब्दावली को लेकर समाज, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच जो भ्रांतियां आई हैं उसे यूजीसी को स्पष्ट करना चाहिए। सभी विद्यार्थियों के लिए भेदभाव मुक्त वातावरण सुनिश्चित करना जरूरी हैं।

लेटेस्ट Hindi News , Delhi News , Ghaziabad News , Noida News , Gurgaon News और Faridabad News सहित पूरी NCR News पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।