Sunjay Kapur sister Mandhira Kapur on Delhi High Court granting interim relief in plea by Karisma Kapoor children हम बहुत खुश हैं, करिश्मा कपूर के बच्चों की याचिका पर HC के फैसले पर मंधिरा कपूर ने बताया अगला कदम, Ncr Hindi News - Hindustan
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हम बहुत खुश हैं, करिश्मा कपूर के बच्चों की याचिका पर HC के फैसले पर मंधिरा कपूर ने बताया अगला कदम

दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की बहन मंधिरा कपूर ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश का स्वागत किया है, जिसमें करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा दायर अंतरिम रोक की याचिका को मंजूरी दी गई है। करीब 30000 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर किसी तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने पर भी रोक लगा दी गई है।

Thu, 30 April 2026 06:54 PMSubodh Kumar Mishra एएनआई, नई दिल्ली
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हम बहुत खुश हैं, करिश्मा कपूर के बच्चों की याचिका पर HC के फैसले पर मंधिरा कपूर ने बताया अगला कदम

दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की बहन मंधिरा कपूर ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश का स्वागत किया है, जिसमें करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा दायर अंतरिम रोक की याचिका को मंजूरी दी गई है। करीब 30000 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर किसी तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने पर भी रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने इस बात का संज्ञान लिया कि मुकदमे में समय लग सकता है और इस दौरान संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

तकनीकी रूप से ये मेरी मां की संपत्तियां हैं

दिवंगत संजय कपूर की बहन मंधिरा कपूर ने एएनआई को बताया कि अगला कदम वसीयत की फोरेंसिक जांच करवाना है। न्याय हुआ है। इस पूरी लड़ाई की दिशा में उठाए गए पहले कदम से हम बहुत खुश हैं। तकनीकी रूप से ये मेरी मां की संपत्तियां हैं। हमें इस बात की ज्यादा चिंता है कि संपत्तियां कहीं बर्बाद न हो जाएं। उन्हें वापस परिवार के पास आना चाहिए। बच्चों की देखभाल की जानी चाहिए। यह परिवार, मेरी मां और बच्चों के लिए एक बहुत अच्छा आदेश है।

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तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने पर भी रोक

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को करिश्मा कपूर के बच्चों की अंतरिम रोक लगाने की याचिका को मंजूरी दे दी। कोर्ट ने दिवंगत संजय कपूर की संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। साथ ही संपत्तियों पर किसी तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने पर रोक लगा दी।

खातों के विवरण जमा करने का निर्देश

अदालत ने खातों के विवरण जमा करने का भी निर्देश दिया और विदेशी बैंक खातों तथा क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स के संचालन पर रोक लगा दी। यह देखते हुए कि याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादी नंबर 3 (संजय कपूर की मां रानी कपूर) द्वारा संदेह जताया गया है। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इन संदेहों को दूर करने की जिम्मेदारी प्रतिवादी नंबर 1 प्रिया कपूर (संजय कपूर की पत्नी) पर है।

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संपत्तियों की सुरक्षा जरूरी

कोर्ट ने आगे यह भी फैसला दिया कि जहां तक संपत्ति के संरक्षण का सवाल है तो इसका जवाब 'हां' में ही होना चाहिए। कोर्ट ने इस बात का संज्ञान लिया कि मुकदमे में समय लग सकता है और इस दौरान संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए सभी वैध मुद्दों का समाधान प्रतिवादी नंबर 1 (प्रिया कपूर) द्वारा किया जाना चाहिए। यह आदेश दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की संपत्ति को लेकर चल रहे एक हाई-प्रोफाइल विवाद के संबंध में आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद अंतरिम याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

वसीयत की वैधता का बचाव

यह निषेधाज्ञा याचिका उनकी पहली शादी से हुए बच्चों द्वारा दायर की गई थी, जिनकी मां अभिनेत्री करिश्मा कपूर हैं। उन्होंने वसीयत की प्रामाणिकता को चुनौती दी है। बहस के दौरान प्रिया कपूर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने संपत्ति छिपाने या उसका गबन करने के आरोपों से इनकार किया और जोर देकर कहा कि सभी जानकारियां पूरी तरह से सार्वजनिक की गई हैं। उन्होंने कीमती चीजों से जुड़े दावों पर भी असहमति जताई और वसीयत की वैधता का बचाव करते हुए कहा कि इसे उसी प्रारूप में तैयार किया गया है, जैसा कि परिवार की एक अन्य वसीयत में अपनाया गया था।

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वसीयत की भाषा और तरीके पर सवाल

इसका विरोध करते हुए बच्चों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने वसीयत में कथित विसंगतियों की जानकारी दी। उन्होंने वसीयत की भाषा, रजिस्ट्रेशन की कमी और इसे तैयार करने के तरीके पर सवाल खड़े किए। उन्होंने तर्क दिया कि इस मामले में कड़ी जांच की जरूरत है, क्योंकि प्रिया कपूर ही इस वसीयत को पेश करने वाली और इसकी एकमात्र लाभार्थी हैं। इसके अलावा, संजय कपूर की मां रानी कपूर ने भी इस वसीयत को चुनौती दी है। उनका दावा है कि उन्हें इस वसीयत के अस्तित्व के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और उन्होंने संपत्ति के खुलासे की सीमा पर भी सवाल उठाए हैं।

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लगभग 30000 करोड़ रुपए की अनुमानित संपत्ति से जुड़ा यह विवाद अभी भी कोर्ट में चल रहा है। अब हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश से यह सुनिश्चित हो गया है कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक संपत्ति सुरक्षित रहेगी।

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