इसे अभिशाप नहीं बनाना चाहिए; संजय कपूर की संपत्ति विवाद पर HC ने क्यों कही ऐसी बात
दिल्ली हाईकोर्ट ने बिजनेसमैन संजय कपूर की संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद पर सख्त रुख अपनाते हुए सभी पक्षों को आपसी समझौते (मध्यस्थता) पर विचार करने की सलाह दी है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने बिजनेसमैन संजय कपूर की संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद पर सख्त रुख अपनाते हुए सभी पक्षों को आपसी समझौते (मध्यस्थता) पर विचार करने की सलाह दी है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस मिनी पुष्करणा ने इस पारिवारिक कलह पर दुख जताते हुए कहा कि यह बहुत ही दयनीय स्थिति है और परिवार की निजी बातों को इस तरह सार्वजनिक रूप से उछालना ठीक नहीं है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि भगवान ने सभी पक्षों को अपार धन-दौलत दी है, जिसका आनंद लिया जाना चाहिए, इसे अभिशाप नहीं बनने देना चाहिए।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कानूनी लड़ाई संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर, उनकी पूर्व पत्नी करिश्मा कपूर (बच्चों की ओर से) और संजय की मां रानी कपूर के बीच चल रही है। विवाद की जड़ साल 2025 की एक वसीयत है, जिसे प्रिया सचदेव ने पेश किया है। इस वसीयत के मुताबिक, संजय ने अपनी पूरी निजी संपत्ति प्रिया के नाम कर दी है। हालांकि, करिश्मा कपूर और संजय की मां रानी कपूर ने इस वसीयत को फर्जी बताते हुए चुनौती दी है। रानी कपूर ने तो फैमिली ट्रस्ट को भी अवैध घोषित करने की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रिया सचदेव कपूर के वकील को विशेष रूप से सक्रिय भूमिका निभाने को कहा। जस्टिस पुष्करणा ने सहानुभूति जताते हुए कहा कि संजय की मां रानी कपूर इस उम्र में अपने बेटे को खोने का दुख झेल रही हैं, वहीं प्रिया भी अपने बच्चों के साथ अकेली हैं और उन्हें भी देखभाल की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता के जरिए ऐसा रास्ता निकाला जाए जिसमें सभी के हितों का ध्यान रखा जा सके।
फिलहाल, रानी कपूर ने कोर्ट से मांग की है कि लगभग 28 करोड़ रुपये का अंतरिम लाभांश (डिविडेंड) प्रिया कपूर को न दिया जाए। वहीं, प्रिया कपूर ने अपनी सास द्वारा दायर मुकदमे को खारिज करने की अर्जी दी है। अदालत ने इन सभी आवेदनों पर नोटिस जारी कर दिए हैं, लेकिन साथ ही वकीलों को निर्देश दिया है कि वे अपने मुवक्किलों से बातचीत कर सुलह की संभावना तलाशें। इस मामले की अगली सुनवाई अब 23 मार्च को होगी।




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