साकेत सुसाइड मामले में कर्मचारियों ने वापस ली हड़ताल, किस बात का मिला भरोसा?
दिल्ली की साकेत कोर्ट के कर्मचारियों ने सहकर्मी की आत्महत्या के विरोध में प्रस्तावित हड़ताल को रद्द कर दिया है। यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय के साथ बैठक के बाद लिया।

साकेत कोर्ट के कर्मचारियों ने अपने सहकर्मी हरीश सिंह महार की आत्महत्या के विरोध में हड़ताल वापस ले ली है। यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया जिसमें उन्होंने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और काम का दबाव कम करने का भरोसा दिया। 60 फीसदी दिव्यांग क्लर्क हरीश ने सुसाइड नोट में मानसिक पीड़ा का जिक्र करते हुए कोर्ट की 5वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी थी।
किस बात का मिला भरोसा
जिला एवं सत्र न्यायालय कर्मचारी कल्याण संघ के पत्र के अनुसार, दो घंटे चली बैठक में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर जरूरी निर्देश दिए। इसमें काम का बोझ कम करने के लिए अदालत में नए कर्मचारियों की भर्ती करने का फैसला भी शामिल है।
सुसाइड नोट में क्या बताई थी वजह?
पुलिस ने जानकारी दी कि न्यायाधीश नंदिनी गर्ग की अदालत में तैनात प्रशासनिक क्लर्क हरीश सिंह महार ने शुक्रवार सुबह साकेत कोर्ट की 5वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। हरीश 60 प्रतिशत दिव्यांग थे। उन्होंने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है। इस उन्होंने काम के भारी दबाव और मानसिक तनाव को अपनी आत्महत्या की वजह बताया है।
भड़क गए थे कर्मचारी
इस घटना के बाद अदालत परिसर के भीतर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। सभी कर्मचारी अपने दफ्तरों से बाहर निकल आए और उन्होंने काम रोकने का फैसला किया। कर्मचारियों ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुरविंदर पाल सिंह से मुलाकात की और उनसे इस मामले में तुरंत कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
बातचीत के बाद खत्म की हड़ताल
जब न्यायाधीश ने कर्मचारियों को रिट याचिका दायर करने के लिए कहा तो वे नाराज हो गए। विरोध स्वरूप उन्होंने शनिवार को होने वाली लोक अदालत के बहिष्कार का ऐलान कर दिया। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय से बातचीत के बाद हड़ताल खत्म कर दी गई। मृतक हरीश महार फरीदाबाद के रहने वाले थे और उनके परिवार में 94 साल के बुजुर्ग पिता हैं। वह पिछले 3 महीनों से साकेत कोर्ट में सेवाएं दे रहे थे।




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