Refusing to marry after sex on the pretext of horoscope is a crime Delhi high court सेक्स के बाद कुंडली का बहाना देकर शादी से मना करना अपराध, रेप केस में बोला दिल्ली हाई कोर्ट, Ncr Hindi News - Hindustan
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सेक्स के बाद कुंडली का बहाना देकर शादी से मना करना अपराध, रेप केस में बोला दिल्ली हाई कोर्ट

याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा सुनवाई कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि पेश की गई सामग्री से पता चलता है कि आरोपी ने महिला को भरोसा दिया था कि कुंडली मिल गई है। साथ ही शादी में कोई बाधा नहीं आएगी। एक संदेश में आरोपी ने कथित तौर पर कहा था कि कल ही शादी कर रहे हैं हम।

Tue, 24 Feb 2026 10:52 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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सेक्स के बाद कुंडली का बहाना देकर शादी से मना करना अपराध, रेप केस में बोला दिल्ली हाई कोर्ट

शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाना और बाद में कुंडली नहीं मिलने के नाम पर इनकार करना अपराध हो सकता है। हाल ही में एक मामले में सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने यह बात कही है। कोर्ट का कहना है कि ऐसा बर्ताव उस आदमी की तरफ से किए गए वादों की वास्तविकता पर शक पैदा करता है। अदालत ने रेप के आरोपी की तरफ से दाखिल जमानत की याचिका को खारिज कर दिया है।

याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा सुनवाई कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि पेश की गई सामग्री से पता चलता है कि आरोपी ने महिला को भरोसा दिया था कि कुंडली मिल गई है। साथ ही शादी में कोई बाधा नहीं आएगी। एक संदेश में आरोपी ने कथित तौर पर कहा था कि कल ही शादी कर रहे हैं हम।

बेंच ने कहा कि शुरुआत में शादी का भरोसा देने के बाद, 'कुंडली न मिलने' का आधार बनाकर शादी से इनकार करना, पहली नजर में आवेदक द्वारा किए गए वादे की असलियत और उसकी मंशा पर सवाल उठाता है। इस स्तर पर ऐसा व्यवहार BNS की धारा 69 के तहत अपराध की श्रेणी में आएगा, जो विशेष रूप से उन मामलों से संबंधित है जहाँ धोखे या शादी के झूठे आश्वासन के माध्यम से यौन संबंध बनाए जाते हैं।

क्या था मामला

शिकायतकर्ता महिला के आरोप थे कि आरोपी उसके साथ लंबे समय तक रिलेशन में रहा। उन्होंने आरोप लगाए थे कि आरोपी ने शादी के वादे के आधार पर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। महिला ने यह भी दावा किया आरोपी और उसके परिवार की तरफ से शादी का वादा मिलने के बाद पहले शिकायत वापस ले ली गई थी। हालांकि, बाद में आरोपी ने कुंडली नहीं मिलने की बात कहकर शादी से इनकार कर दिया।

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कोर्ट ने उठाए सवाल

जस्टिस शर्मा ने पाया कि व्यक्ति का यह स्टैंड उसके पिछले दावों से मेल नहीं खाता। अदालत ने यह भी कहा कि यदि कुंडली का मिलना इतना ही निर्णायक और महत्वपूर्ण था, तो शारीरिक संबंध बनाने से पहले ही इस मुद्दे को सुलझा लिया जाना चाहिए था।

कोर्ट ने यह भी कहा कि कुंडली को आधार बनाकर पहले सुलझने का वादा किया गया और बाद में उसी को लेकर इनकार किया गया। कोर्ट ने कहा कि इससे पता चलता है कि हो सकता है कि सहमति झूठे वादे के आधार पर हासिल की गई हो।

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