'शीशमहल' नहीं बनाते केजरीवाल तो शायद 2300 लोगों की जान बच जाती; प्रवेश वर्मा ने बताई वजह
प्रवेश वर्मा ने दो फोटो दिखाए, जिसमें से एक में शीशमहल बनने से पहले की और दूसरे फोटो में शीशमहल बनने के बाद की तस्वीर दिखाई गई थी। उन्होंने बताया कि जब शीश महल नहीं बना था तब वहां कितनी हरियाली थी, कितने सारे पेड़ थे। लेकिन शीशमहल के लिए सभी पेड़ों को काट दिया गया।

दिल्ली विधानसभा में बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास (6, फ्लैग स्टाफ रोड) पर आई CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) रिपोर्ट पर चर्चा हुई, जिस पर बोलते हुए मंत्री प्रवेश वर्मा ने पूर्व आम आदमी पार्टी की सरकार पर जमकर हमला बोला। अपने वक्तव्य की शुरुआत एक शायरी के साथ करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं बचाता रहा दीमक से घर अपना, और चंद कुर्सी के कीड़े पूरी दिल्ली को खा गए'। वर्मा ने केजरीवाल की तुलना कुछ महीने पहले रिलीज हुई फिल्म 'धुरंधर' के किरदार रहमान डकैत से करते हुए उन्हें दिल्ली के पैसों पर डाका डालने वाला डकैत बताया। इस दौरान वर्मा ने यह भी कहा कि कोविड आपदा के दौरान अगर AAP सरकार ने शीश महल पर 58 करोड़ रुपए खर्च ना करते हुए उन पैसों को ICU वेंटिलेटर बनाने में खर्च किया होता तो दिल्ली में 2300 नए ICU वेंटिलेटर बेड बन जाते और शायद कम से कम 2300 लोगों की जान बच जाती। वर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि कोविड के समय में अकेले दिल्ली में 26 हजार लोगों की जान गई थी।
दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री ने बताया कि 'शीश महल के बनाते वक्त कोविड चल रहा था। भारत सरकार ने कोविड के समय दिल्ली सरकार को 787.91 करोड़ रुपए की सहायता दी थी। यह सोचकर कि हम आपको पैसा दे रहे हैं, आप दिल्ली में लोगों की जान बचा लीजिए। वह पैसा अरविंद केजरीवाल से खर्च नहीं हुआ। 787.91 करोड़ में से केजरीवाल जी ने केवल 582 करोड़ रुपए खर्च किया। भारत सरकार का पैसा था, दिल्ली सरकार का एक भी रुपया नहीं था। भारत सरकार ने पैसा दिया था। मगर जान बचाने का पैसा खर्च नहीं हो रहा था, उस पैसे को बचा रहे थे, मगर शीश महल का जो पहला टेंडर एस्टीमेट बना था वह बना था साढ़े सात करोड़ रुपए का था, जिसे बढ़ाकर वे 55 करोड़ रुपए तक ले गए।'
'कांस्टेबल को नहीं दिए 1 करोड़ रुपए'
आगे उन्होंने कहा, 'कोविड के समय में दिल्ली पुलिस कांस्टेबल अमित कुमार ने दिल्ली में बीमार लोगों की अस्पताल में जान बचाते हुए अपनी जान गंवाई। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा मैं अमित कुमार को एक करोड़ रुपए दूंगा, मगर क्योंकि वह उनका वोट बैंक नहीं था इसलिए एक करोड़ नहीं मिला। वह कांस्टेबल की पत्नी को हाई कोर्ट जाना पड़ा, कि मेरे पति ने दिल्ली के लोगों की जान बचाई। वहां से ऑर्डर मिला तब उनको पैसा मिला।'
'..तो शायद बच जाती 2300 लोगों की जान'
इसके बाद एकबार फिर प्रवेश वर्मा ने शायरी कहते हुए हमला बोला और कहा, ‘खजाने खाली, महल ऊंचे, राजा के बस अपने कूचे। अध्यक्ष जी कोविड के दौरान भारत सरकार ने एक ICU बेड की कॉस्ट को 15 हजार रुपए पर फिक्स कर दिया था। ऐसे में अगर यह 58 करोड़ रुपए जो शीश महल पर खर्च हुआ था, अगर इन पैसों को ICU वेंटिलेटर बनाने में खर्च किया होता तो हम दिल्ली में 2300 नए ICU वेंटिलेटर बेड बनाकर 2300 लोगों की जान बचा पाते। 26,000 लोगों की मृत्यु हुई।'
प्रवेश वर्मा ने आगे कहा, ’अकेले दिल्ली में 26 हजार लोग मरे थे। अगर यह 58 करोड़ रुपए उसी समय में शीश महल में खर्च नहीं होते तो दिल्ली में 2300 लोगों की जान बच जाती। मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया। आप देखिए कि शीश महल बन रहा था और वह सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट क्या बोलता था। सुप्रीम कोर्ट ने 12 जून 2020 को बोला कि दिल्ली की कोविड स्थिति खतरनाक हो गई है, डरावनी हो गई है। मरीजों के साथ जानवरों से बदतर व्यवहार किया जा रहा है और उसी समय दूसरी तरफ टेंडर हो रहा था।'
'शपथ लेने के 20 दिन के अंदर जनता को टोपी पहनाई'
इससे पहले शीशमहल पर चर्चा के दौरान अपने भाषण की शुरुआत करते हुए प्रवेश वर्मा ने कहा, ‘हमें याद है कि जब पहले आम आदमी पार्टी की सरकार के मुखिया अरविंद केजरीवाल जी दिल्ली के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने यह शपथ ली थी कि मैं कोई सरकारी गाड़ी नहीं लूंगा, सरकारी घर नहीं लूंगा, सरकारी बंगला नहीं लूंगा, ना ही कोई सिक्योरिटी लूंगा। मगर उनके शपथ लेते ही 20 दिन के अंदर उन्होंने दिल्ली की जनता को टोपी पहना दी। 20 दिन के अंदर-अंदर उन्होंने 4 मार्च 2015 को छह फ्लैगस्टाफ रोड पर जो बंगला था, उसको खुद ही अपने आप को अलॉट किया और साढ़े चार साल के बाद में 2020 के दौरान दिल्ली में दो आपदाएं आईं। पहली आपदा कोविड की और दूसरी आपदा आम आदमी पार्टी की। जैसे ही वो लोग आए तो उन्होंने सबसे पहले अपना शीश महल बनाने का काम शुरू किया।’
'यह सोचकर बनवाया था, मुझे कोई हरा नहीं पाएगा'
प्रवेश वर्मा ने बताया कि 'शीश महल जो बना, वो शीश महल अरविंद केजरीवाल जी ने ये सोच के बनाया था कि जीवन में मुझे कोई चुनाव नहीं हरा पाएगा। जिस लोकेशन का चयन उन्होंने किया, वहां पर तीन टाइप 5 के बंगले थे, हेरिटेज बंगले थे। वहां पर बहुत सारे पेड़ थे। वहां पर छह गैराज थे, 10 टाइप वन, टाइप टू के क्वार्टर थे। बिना अनुमति केसारे पेड़ों को कटवाकर, सारे घरों को बिना अनुमति के तुड़वाकर, उसके बाद में कहानी शुरू होती है शीश महल बनाने की।
फोटो दिखाकर बताई शीशमहल बनने से पहले व बाद की स्थिति
इसके बाद वर्मा ने दो फोटो दिखाए, जिसमें से एक में शीशमहल बनने से पहले की और दूसरे फोटो में शीशमहल बनने के बाद की तस्वीर दिखाई गई थी। इसके जरिए उन्होंने बताया कि जब शीश महल नहीं बना था तब वहां कितनी हरियाली थी, कितने सारे पेड़ दिखाई दे रहे थे। वहीं जब शीश महल बन गया तो वहां काफी जगह खाली-खाली नजर आने लगी, उन्होंने बताया कि इन खाली जगहों पर पेड़ थे, जिन्हें बिना अनुमति कटवा दिया गया। एक भी पेड़ काटने की अनुमति नहीं ली गई। सारे घरों को तुड़वा दिया गया। तीन वहां पर ऑफिसर रहते थे, तीनों का घर खाली कराया गया। तीन वहां पर सेक्रेटरी रहते थे, तीनों का घर खाली कराया गया। सारे गैराज को तुड़वाया, सर्वेंट क्वार्टर्स तोड़ दिए, आठ-दस क्वाटर तोड़ दिए।'




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