नोएडा में 100 करोड़ के जमीन मुआवजा घोटाले में 6 FIR, सपा नेता समेत 3 अफसर नामजद
एसआईटी लखनऊ ने नोएडा प्राधिकरण में हुए 100 करोड़ रुपये के कथित जमीन मुआवजा घोटाले में आरोपियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। एसआईटी की तरफ से इस मामले में नोएडा में छह मुकदमे दर्ज कराए हैं। इन मुकदमों में एक सपा नेता और 3 प्राधिकरण के अफसरों को नामजद किया गया है।

नोएडा प्राधिकरण में 100 करोड़ रुपये से अधिक के जमीन मुआवजा घोटाले के मामले में एसआईटी लखनऊ ने नोएडा में छह मुकदमे दर्ज कराए हैं। इनमें सपा नेता समेत तीन लोगों को मुआवजे की रकम हड़पने और पीड़ितों के बैंक खाते खुलवाने में नामजद किया गया है। प्राधिकरण के तीन विधि अधिकारियों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में भ्रष्टाचार निवारण का मुकदमा दर्ज कराया गया है।
नोएडा में भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों को दिए गए अत्यधिक मुआवजे के मामले में शासन स्तर से गठित एसआईटी जांच कर रही है। इस वर्ष अप्रैल में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के लिए छह सप्ताह का समय दिया था। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि किसानों को अधिक मुआवजा देने के बदले अधिकारियों ने दस प्रतिशत कमीशन नकद लिया। इस खुलासे के बाद प्राधिकरण के अधिकारियों की आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने जांच के निर्देश दिए। जांच के बाद अब एसआईटी की ओर से नोएडा के फेज-1 थाने में छह मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। इनमें तीन मामलों में मुआवजे की राशि हड़पने और बाकी तीन मामलों में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं। मामले में प्राधिकरण के तीन अधिकारी राजेश कुमार, दिनेश कुमार सिंह, वीरेंद्र कुमार नागर और सपा नेता विजेंद्र कुमार त्यागी समेत राजकुमार और राजकुमार त्यागी के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं।
अधिकारियों ने 10 प्रतिशत कमीशन नकद लिया
मुआवजा घोटाले में एसआईटी की जांच में हुए खुलासे से अधिकारी भी अचम्भित थे। किसानों को सैकड़ों करोड़ का अतिरिक्त मुआवजा बांटने के लिए प्राधिकरण के अधिकारियों ने 10 प्रतिशत कमीशन नकद लिया। एसआईटी ने इस नगद लेन-देन का भी पूरा ब्योरा जुटाते हुए अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में रखी थी। इस मामले को लेकर अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में एसआईटी ने खुलाासा किया था कि जांच में सामने आया है कि कुछ किसानों को ज्यादा मुआवजा दिलाने के बदले अधिकारियों को दस कमीशन नगद रूप में दिया गया था।
वर्ष 2021 में मामला खुला
नोएडा के गांवों में मुआवजा बांटने में गड़बड़ी खुलासा वर्ष 2021 में गेझा तिलपताबाद गांव में हुआ था। अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश न्यायालय ने एक मामले में दिया था। वर्ष 2021 में यह मामला उजागर होने के बाद जांच शुरू हुई तो अन्य मामले सामने आए।
कई गांव जांच के दायरे में
जिन गांवों में मुआवजा घोटाला होने की बात सामने आई है, उनमें बादौली बांगर, बादौली खादर, सुथियाना, कुंडली बांगर, छिजारसी, रोहिल्लापुर, सुल्तानपुर, याकूबपुर, बेगमपुर, छपरौली बांगर, सदरपुर, लखनावली, बहलोलपुर, चोटपुर, नगली-नगला, सलारपुर आदि गांव शामिल हैं।
ये है पूरा घोटाला
नोएडा में साल 1982 में जमीन अधिग्रहण की एक बड़ी प्रक्रिया हुई थी। शुरुआती मुआवजा 10.12 रुपये प्रति वर्ग की दर से दिया गया। जमीन मालिकों की याचिका पर 1993 में अदालत ने दर बढ़ाकर 16.61 रुपये प्रति वर्ग गज भुगतान करने का आदेश दिया। भुगतान कर दिया गया। 2015 में हाईकोर्ट में फिर से मुआवजे का दावा दायर किया, मगर अदालत ने याचिका खारिज कर दी। उसी वर्ष प्राधिकरण ने भूमि मालिकों के लंबित दावों का निपटारा करने के लिए एक नई नीति बनाई और दर 297 रुपये प्रति वर्ग गज तय कर दी। यहीं से घोटाला शुरू हुआ।
रिपोर्ट - निशांत कौशिक
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