Noida techie yuvraj mehta stood atop car for 90 minutes before it sank 80 failed to rescue him डूबने से पहले कार की छत पर 90 मिनट तक रहे रहे युवराज, 80 मिलकर भी नहीं बचा पाए; नोएडा की दर्दनाक कहानी, Ncr Hindi News - Hindustan
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डूबने से पहले कार की छत पर 90 मिनट तक रहे रहे युवराज, 80 मिलकर भी नहीं बचा पाए; नोएडा की दर्दनाक कहानी

ग्रेटर नोएडा में एक हादसे के बाद डूबकर जान गंवाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कहानी बेहद दर्दनाक है। 27 साल के युवराज ने खुद को बचाने की भरसक कोशिश की। बचाव टीम भी मौके पर पहुंची लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

Mon, 19 Jan 2026 10:10 AMSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, नोएडा
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डूबने से पहले कार की छत पर 90 मिनट तक रहे रहे युवराज, 80 मिलकर भी नहीं बचा पाए; नोएडा की दर्दनाक कहानी

ग्रेटर नोएडा में एक हादसे के बाद डूबकर जान गंवाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कहानी बेहद दर्दनाक है। 27 साल के युवराज ने खुद को बचाने की भरसक कोशिश की। हिम्मत से काम लिया। पानी से लबालब 50 मीटर गहरे गड्ढे में गिरने के बाद संघर्ष करते हुए वह कार की छत पर चढ़ने में कामयाब रहे। पिता को फोन करके हादसे की सूचना दी। डूबने से पहले करीब 90 मिनट तक वह कार की छत पर खड़े होकर जल्दी बचाने की गुहार लगाते रहे। लेकिन तीन विभागों के करीब 80 कर्मचारी मिलकर भी उनकी जान नहीं बचा पाए।

बाद में बचाव अभियान के अफसल होने की कई वजहें गिनाई गईं। बताया गया कि कोहरा बहुत घना था, अंधेरा था और रस्सियों-सीढ़ियों की लंबाई इंजीनियर तक पहुंचने के लिए काफी नहीं थी। युवराज मेहता गुरुग्राम की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करते थे। शुक्रवार देर रात वह मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा कार से नोएडा सेक्टर 150 में टाटा यूरेका पार्क स्थित अपने घर लौट रहे थे।

घना कोहरा होने की वजह से वह गलत जगह कार को मोड़ बैठे। कार नाले की दीवार तोड़कर प्लॉट में भरे पानी में जा गिरी थी। यहां बिल्डर ने बेसमेंट के लिए खुदाई की थी,जिसमें बरसात का पानी भरा हुआ है। पुलिस के मुताबिक गड्ढे के बाहर कोई बैरिकेड या रिफ्लेक्टिव चेतावनी नहीं थी। मेहता किसी तरह कार की छत पर चढ़ने में कामयाब रहे। उन्होंने अपने पिता को फोन करके मदद मांगी। पिता राज कुमार मेहता ने एचटी को बताया, 'मेरे बेटे ने मुझे फोन किया। उसने कहा- पापा मैं फंस गया हूं। कार नाली में गिर गई है।'

पुलिस, अग्निशमन विभाग, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की टीमें मौकें पर पहुंचीं। हालांकि, कहा जा रहा है कि घने कोहरे की वजह से बचाव दल को मौके पर पहुंचने में देरी हुई। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक युवराज को मेहता को बचाने के लिए उनकी रस्सियां फेंकी गईं लेकिन छोटी पड़ गईं। इसके अलावा एक क्रेन और सीढ़ियों से भी बचाने की कोशिश की गई लेकिन इनकी मदद से भी युवराज तक नहीं पहुंचा जा सका। मेहता पूरी तरह डूबने से पहले 90 मिनट तक कार की छत पर खड़े रहे और उम्मीद करते रहे कि उन्हें बचा लिया जाएगा। बाद में उनके शव को नाव की मदद से बाहर निकाला गया।

पानी में उतरने की हिम्मत नहीं कर पाए बचावकर्मी

इंजीनियर युवराज की मौत ने अनेक सवाल भी खड़े कर दिए हैं। युवराज के दोस्तों और मौके पर जुटे अन्य लोगों का कहना है कि इस घटना में दमकल, एसडीआरएफ और पुलिस की मानवीय संवेदनहीनता सामने आई है। किसी ने भी पानी में उतरने कि हिम्मत नहीं जुटाई। दमकल और एसडीआरएफ के पास आपदा से निपटने के संसाधन कम पड़ गए।

उस रात कब क्या हुआ?

12:05- अनियंत्रित कार बेसमेंट में गिरी। 12.25 बजे युवराज ने पिता को फोन पर सूचना दी।

12.41- कंट्रोल रूम से कोतवाली प्रभारी के पास फोन आया।

12.50- पुलिस फोर्स और दमकल कर्मी घटना स्थल पर पहुंचे।1.15 बजे एसडीआरएफ टीम पहुंची।

1.45- बेसमेंट में भरे पानी में कार समेत युवक डूबा।

1.55- गाजियाबाद से एनडीआरएफ टीम पहुंची।

4.30- युवक को अस्पताल पहुंचाया, जहां मृत घोषित कर दिया।

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