Noida labour Protest Yogi Govt Gives 21 percent increment But Why Workers Angry over Fake Claim on salary योगी सरकार ने '21%' दिया पर क्या थी '20 वाली झूठी बात', जिस पर भड़के थे नोएडा के श्रमिक, Ncr Hindi News - Hindustan
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योगी सरकार ने '21%' दिया पर क्या थी '20 वाली झूठी बात', जिस पर भड़के थे नोएडा के श्रमिक

Noida Labour Protest: नोएडा में श्रमिकों ने प्रदर्शन वापस ले लिया और आज से वे काम पर लौट आए। योगी सरकार ने 21 फीसदी की राहत तो दे दी… लेकिन ‘20 वाली झूठी बात’ क्या थी, जिस पर श्रमिक भड़के थे।

Wed, 15 April 2026 01:16 PMGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, नोएडा
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योगी सरकार ने '21%' दिया पर क्या थी '20 वाली झूठी बात', जिस पर भड़के थे नोएडा के श्रमिक

Noida Labour Protest: उत्तर प्रदेश के नोएडा में बीते सप्ताह श्रमिकों ने हिंसक धरना प्रदर्शन किया था। इस दौरान कई सौ श्रमिकों को हिरासत में लिया गया। हालांकि अब हालात सामान्य हैं और योगी आदित्यनाथ सरकार ने श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत का इजाफा कर दिया है। बुधवार को अधिकतर फैक्ट्रियां खुली और श्रमिक काम करने के लिए आए। क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थान भी खुल गए हैं। सवाल यह है कि श्रमिकों में '20 वाली झूठी बात' क्या फैलाई गई... जिस पर वे भड़के थे।

इस बीच नोएडा में भारी बवाल को लेकर पुलिस द्वारा की जा रही गिरफ्तारियों पर श्रमिकों में डर है। उन्हें अंदेशा है कि कहीं उपद्रवी मानकर उन्हें गिरफ्तार न कर लिया जाए। श्रमिक अपनी मांगों को लेकर सुबह कुछ स्थानों पर इकट्ठा होना भी शुरू हुए, जिन्हें पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने समझा-बुझाकर वापस काम पर भेज दिया। किसी के भी हिंसक होने के प्रयास किए जाने पर पुलिस ने हिरासत में लिए जाने की चेतावनी दी है।

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'20 वाली झूठी बात' क्या है?

योगी सरकार ने श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में 21 प्रतिशत कर इजाफा किया है। यहां '20 वाली झूठी बात' यह है कि कर्मचारियों में भ्रम फैलाया गया कि सरकार ने नए लेबर लॉ के हिसाब से श्रमिकों का वेतन कम से कम 20 हजार तय किया है, लेकिन उनको वो वेतन नहीं दिया जा रहा है।

श्रमिकों को किसने भड़काया?

कई श्रमिकों ने प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत में ऐसी बात कही थी, जिससे इस आशंका को बल मिलता है कि उन्हें भड़काया गया या भ्रमित किया गया। श्रमिकों के मुताबिक, फैक्ट्री मालिक उन्हें उचित सैलरी नहीं दे रहे हैं। इस मामले में बाकायदा जिला प्रशासन की ओर से विज्ञप्ति भी सार्वजनिक की गई।

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प्रशासन ने क्या कहा

जिला प्रशासन की तरफ से कहा गया कि कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह मनगढ़ंत एवं झूठी जानकारी प्रचारित की जा रही है कि श्रमिकों का न्यूनतम वेतन ₹20000 प्रति माह निर्धारित कर दिया गया है, जिसका फैक्ट्री मालिकों द्वारा पालन नहीं किया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि भारत सरकार द्वारा नई लेबर कोड के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम “फ्लोर वेज” निर्धारित करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। इस पहल का उद्देश्य देशभर के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन की एक समान आधार रेखा सुनिश्चित करना है, जिससे सभी राज्यों में श्रमिकों को न्यायसंगत एवं उचित पारिश्रमिक प्राप्त हो सके।

राज्य सरकार द्वारा भी फैक्ट्री मालिकों, संगठनों एवं श्रमिक संगठनों सहित सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है। प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों का गंभीरता से परीक्षण किया जा रहा है, ताकि संतुलित एवं व्यावहारिक निर्णय लिया जा सके।

यूपी में श्रमिकों के लिए वेतन की दरें

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में न्यूनतम वेतन की दरें जारी की गई हैं, जिनके अनुसार अकुशल श्रमिकों को ₹11313.65 मासिक तथा दैनिक मजदूरी ₹435.14 घोषित हुई है। इसी प्रकार अर्धकुशल श्रमिक के लिए मासिक मजदूरी ₹12446 तथा दैनिक मजदूरी ₹478.69 तय की गई है। कुशल श्रमिक वर्तमान में ₹13940.37 तथा दैनिक रूप से ₹536.16 वेतन ले रहा है।

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श्रमिकों की और क्या मांगें थीं?

प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने केवल वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी उठाईं। उनकी प्रमुख मांगों में समय पर वेतन भुगतान को प्राथमिकता देना शामिल था, जिसके तहत हर महीने की 10 तारीख से पहले वेतन खातों में जमा करने की बात कही गई।

इसके अलावा श्रमिकों ने वार्षिक बोनस को समय से पहले देने की मांग रखी, जिस पर सहमति बनते हुए नवंबर से पहले बोनस देने की बात कही गई। ओवरटाइम और साप्ताहिक अवकाश के दिनों में काम करने पर दोगुना वेतन देने की मांग भी प्रमुख रही, जिसे स्वीकार करने का आश्वासन दिया गया।

महिला श्रमिकों की सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा रहा। इसके तहत कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के समाधान के लिए विशेष समितियां गठित करने की मांग की गई, जिनकी अध्यक्षता महिलाएं करेंगी। साथ ही, शिकायत दर्ज कराने के लिए शिकायत पेटियां लगाने की भी बात कही गई।

नए लेबर कोड में क्या है?

केंद्र सरकार के नए लेबर कोड को आसान भाषा में समझते हैं। यह कानून खासकर उन छोटी फैक्ट्रियों या असंगठित समूहों के लिए है, जहां नियमों की अनदेखी के आरोप लगते हैं।

अपॉइंटमेंट लेटर जरूरी

अब सिर्फ जुबानी वादा नहीं चलेगा। हर कर्मचारी को लिखित अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा।

समय पर सैलरी

कंपनियों को तय समय सीमा (आमतौर पर 7 दिन के भीतर) में वेतन देना होगा। देरी नहीं चलेगी।

फिक्स काम के घंटे और डबल ओवरटाइम

काम के घंटे तय रहेंगे। तय समय से ज्यादा काम करने पर ओवरटाइम का दोगुना पैसा मिलेगा।

छोटे श्रमिकों को भी सुविधा

छोटी फैक्ट्रियों के मजदूरों को भी अब ESIC और पीएफ जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

महिलाओं के लिए सुरक्षा और बराबरी

समान काम का समान वेतन लागू होगा। नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति होगी, लेकिन सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

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