इतनी गहराई तक कैसे खुदाई हुई... इंजीनियर युवराज मौत मामले में SIT ने मांगे जवाब
इंजीनियर युवराज की मौत की जांच कर रही SIT ने नोएडा प्राधिकरण से 70 फीट गहरे गड्ढे और सुरक्षा चूक पर कड़े सवाल किए हैं। जांच के घेरे में खनन विभाग की NOC और प्राधिकरण के बड़े अधिकारी भी आ गए हैं।

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण से पूछा है कि सेक्टर के बीच इतनी गहराई तक खुदाई और जलभराव कैसे हुआ। अगर खनन विभाग की तरफ से खुदाई की एनओसी दी गई थी तो उसका भी ब्योरा उपलब्ध करवाया जाए।
नोएडा अथॉरिटी से पूछे सवाल
जिस गड्ढे में गिरकर मौत हुई थी, उसकी खुदाई को लेकर एसआईटी ने जानकारी मांगी थी। उसकी जानकारी विभागों ने भेज दी है। इसमें बताया है कि गड्ढे की गहराई जलभराव समेत 55 से 70 फीट होने का अनुमान है। प्राधिकरण की तरफ से जवाब में वर्क सर्कल-10 के जेई एई का नाम दिया गया था। एसआईटी ने जीएम और वरिष्ठ प्रबंधक की भी जिम्मेदारी पर जवाब मांगा है। सड़क सुरक्षा के इंतजाम न होने पर नोएडा ट्रैफिक सेल से जिम्मेदारों के नाम मांगे हैं। इन सवालों के जवाब प्राधिकरण की तरफ से भेजे जाने की सूचना है।
हादसा स्थल पर बना भूखंड स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट नंबर-2 में सब-डिवीजन के बाद निकाला गया ए-3 भूखंड है। नोएडा प्राधिकरण ने 27185 वर्ग मीटर के इस प्लाट पर 2017 में 12 मंजिल इमारत बनाने का नक्शा पास किया था। इसमें एक बेसमेंट बनाने की मंजूरी प्राधिकरण की तरफ से दी गई थी, जिसमें नक्शे के मुताबिक 644 वाहनों की पार्किंग बननी थी। गौरतलब है कि हादसे की जांच कर रही एसआईटी प्राथमिक रिपोर्ट शासन को दे चुकी है। इसके बाद जिम्मेदारी निर्धारण के लिए प्राधिकरण, पुलिस और प्रशासन से दिए गए जवाबों को और स्पष्ट करवाया जा रहा है। सूत्रों की माने तो गहराई से हुई खुदाई को लेकर प्राधिकरण की तरफ से खनन विभाग की एनओसी का हवाला दिया गया है। यह भी बताया गया है कि सड़क पर सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे। बिल्डर को नियोजन, वर्क सर्कल और जल विभाग की तरफ से पत्र भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है। एसआईटी जांच के 11 दिन बीत चुके हैं। इसमें अब तक 250 से ज्यादा पुलिस-प्रशासन-प्राधिकरण के कर्मचारियों व अधिकारियों के बयान दर्ज हुए हैं। विभागों से पहले सवाल फिर उन पर दिए गए जवाबों पर भी सवाल किए गए हैं।
हादसे वाले स्थान पर बैरियर का काम शुरू
इंजीनियर युवराज की मौत के बाद प्राधिकरण घटना स्थल के आसपास सुरक्षा के इंतजाम करने में जुटा है। लोहे के बैरिकेडिंग के बाद कंक्रीट की स्लैब और अब नाले के किनारे क्रैश बैरियर लगाने का काम शुरू किया गया है। सेक्टर-150 स्थित भूखंड में भरे पानी में 16 जनवरी की रात कार गिरने से इंजीनियर युवराज की मौत हो गई थी।




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