No murder charge for hitting a man with a brick during a fight between drunk friends, High Court साथ शराब पी, फिर दोस्त को ईंट से कुचलकर मार डाला; अदालत ने क्यों नहीं सुनाई हत्या की सजा?, Ncr Hindi News - Hindustan
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साथ शराब पी, फिर दोस्त को ईंट से कुचलकर मार डाला; अदालत ने क्यों नहीं सुनाई हत्या की सजा?

जानिए आखिर ऐसा क्या हुआ कि सारे सबूत दोषी दोस्त के खिलाफ थे, फिर भी कोर्ट ने हत्या की सजा नहीं सुनाई। कोर्ट की क्या दलील रही, जिसके बाद दोषी की सजा को उम्रकैद से घटाकर आठ साल कर सश्रम कैद कर दिया गया।

Sun, 24 May 2026 03:58 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, नीतू
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साथ शराब पी, फिर दोस्त को ईंट से कुचलकर मार डाला; अदालत ने क्यों नहीं सुनाई हत्या की सजा?

दो दोस्तों ने साथ मिलकर शराब पी। फिर नशे में धुत एक दोस्त ने दूसरे को ईंट से कुचलकर मार डाला। लेकिन हैरानी की बात यह है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी दोस्त को हत्या की सजा नहीं सुनाई। जानिए आखिर ऐसा क्या हुआ कि सारे सबूत दोषी दोस्त के खिलाफ थे, फिर भी कोर्ट ने हत्या की सजा नहीं सुनाई। कोर्ट की क्या दलील रही, जिसके बाद दोषी की सजा को उम्रकैद से घटाकर आठ साल कर सश्रम कैद कर दिया गया।

अदालत ने हत्या को माना गैर इरादतन हत्या

दो दोस्त साथ-साथ बैठकर शराब पी रहे थे। लेकिन तभी शराब के पैसे देने को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। दोनों नशे में धुत थे। देखते ही देखते झगड़ा बढ़ गया। एक ने दूसरे को ईंट से कई बार हमला किया। उसके बार-बार ईंट मारने से दूसरे दोस्त की मौत हो गई। मामला कोर्ट पहुंचा, तो नशे में हुई कहा-सुनी और मारपीट से जुड़े इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने हत्या की सजा को गैर-इरादतन हत्या में बदल दिया है। हाईकोर्ट ने माना कि यह घटना अचानक गुस्से में हुई थी। इसके पीछे कोई पहले से सोची-समझी योजना नहीं थी।

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जानिए अदालत और सरकारी वकील के तर्क

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह एवं न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने फैसला सुनाया कि यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत नहीं, बल्कि धारा 304 (भाग II) के तहत आएगा। पीठ ने कहा कि भले ही आरोपी को इस बात का पता था कि उसके इस काम से किसी की जान जा सकती है, लेकिन उसका इरादा हत्या करने का नहीं था।

सरकारी वकील का पक्ष यह था कि आरोपी व मृतक आपस में दोस्त थे। उन्होंने साथ बैठकर शराब पी थी और शराब के पैसे देने को लेकर उनके बीच झगड़ा हो गया। इस झगड़े के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर मृतक पर ईंट से बार-बार हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई।

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न दुश्मनी, न हत्या का इरादा… कोर्ट ने नहीं सुनाई हत्या की सजा

हालात का जायजा लेते हुए पीठ ने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि क्या आरोपी ने मृतक की जान ली, बल्कि यह है कि क्या उसने ऐसा हत्या के इरादे के साथ किया था अथवा गुस्से में यह घटना हो गई। इसके बाद पीठ ने कहा कि उनके बीच पहले से कोई दुश्मनी नहीं थी। आरोपी की न ही हत्या करने की कोई पहले से सोची-समझी योजना थी।

इस तर्क को लेकर पीठ ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व के आदेशों का हवाला भी दिया। अदालत ने माना कि आरोपी ने गुस्से और नशे की हालत में हमला किया था। इसलिए इसे सुनियोजित हत्या नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर उम्रकैद की सजा घटाकर आठ साल कर दी गई।

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