Husband cannot escape maintenance by saying he has no income, Delhi HC dismisses plea 'कमाई नहीं है' कहकर गुजाराभत्ते से नहीं बच सकता पति, दिल्ली HC ने याचिका खारिज की, Ncr Hindi News - Hindustan
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'कमाई नहीं है' कहकर गुजाराभत्ते से नहीं बच सकता पति, दिल्ली HC ने याचिका खारिज की

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि कोई पति केवल यह कहकर पत्नी व बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि उसके पास नियमित आय का स्रोत नहीं है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पत्नी व नाबालिग बच्चों का आर्थिक रूप से पालन-पोषण करना पति का दायित्व है।

Thu, 21 May 2026 10:33 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, नीतू
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'कमाई नहीं है' कहकर गुजाराभत्ते से नहीं बच सकता पति, दिल्ली HC ने याचिका खारिज की

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि कोई पति केवल यह कहकर पत्नी व बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि उसके पास नियमित आय का स्रोत नहीं है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पत्नी व नाबालिग बच्चों का आर्थिक रूप से पालन-पोषण करना पति का दायित्व है।

न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें एक पति ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसे अपनी पत्नी व दो बेटियों को 11 हजार रुपये प्रतिमाह प्रति व्यक्ति भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।

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पति ने दलील दी थी कि वह केवल ठेके पर काम करता है। उसकी कोई स्थायी आय नहीं है। उसने यह भी कहा कि वह तपेदिक, मधुमेह व हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित है। साथ ही उसने अपनी वृद्ध मां की जिम्मेदारी और बकाया ऋणों का हवाला देते हुए कहा कि वह इतनी राशि देने की स्थिति में नहीं है। याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि उसकी पत्नी कॉमर्स ग्रेजुएट है, नौकरी करने में सक्षम है। पहले एक निजी कंपनी में काम भी कर चुकी है, जिसकी जानकारी उसने अपनी आय संबंधी हलफनामे में छिपाई।

वहीं पत्नी की तरफ से कहा गया कि पति द्वारा बीमारी, आर्थिक तंगी व ऋण संबंधी जो दावे किए जा रहे हैं, वे फैमिली कोर्ट के समक्ष कभी नहीं उठाए गए थे। पीठ ने उच्चतम न्यायालय के फैसलों भुवन मोहन सिंह बनाम मीना (2015) व अंजू गर्ग बनाम दीपक कुमार गर्ग (2022) का हवाला देते हुए कहा कि पति अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। आवश्यकता पड़ने पर शारीरिक श्रम करके भी पत्नी व बच्चों का पालन-पोषण करना उसका दायित्व है।

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पीठ ने पति के अपने रिकॉर्ड और दस्तावेजों पर भी गौर किया। इससे पता चला कि उसके पास तकनीकी विशेषज्ञता है और वह पहले अच्छी तनख्वाह प्राप्त कर चुका है। रिकॉर्ड पर मौजूद वेतन पर्चियों के अनुसार वर्ष 2021 में उसकी मासिक आय लगभग 40 हजार थी, जबकि बैंक खातों में कई बार बड़ी रकम जमा होने के प्रमाण भी मिले, जिनमें लगभग 60 हजार की एक एंट्री शामिल थी। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए पीठ ने पति की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।

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