Supreme Court s Response to TMC s Election Result Claims पश्चिम बंगाल : चुनाव परिणाम से शिकायत तो अर्जी दाखिल करे टीएमसी : सुप्रीम कोर्ट, Delhi Hindi News - Hindustan
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पश्चिम बंगाल : चुनाव परिणाम से शिकायत तो अर्जी दाखिल करे टीएमसी : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कहा कि यदि उसे विधानसभा चुनाव परिणाम पर एसआईआर के असर का संदेह है, तो औपचारिक अर्जी दाखिल करे। टीएमसी ने दावा किया कि कई सीटों पर मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या और हार का अंतर समान है। कोर्ट ने कहा कि उचित अर्जी मिलने पर विचार किया जाएगा।

Mon, 11 May 2026 09:10 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पश्चिम बंगाल : चुनाव परिणाम से शिकायत तो अर्जी दाखिल करे टीएमसी : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से कहा कि यदि उसे लगता है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वजह से विधानसभा चुनाव का परिणाम प्रभावित हुआ है तो इसके लिए औपचारिक रूप से अर्जी दाखिल करे। शीर्ष अदालत ने यह सुझाव टीएमसी के उस दावे के बाद दिया, जिसमें कहा गया कि एसआईआर की वजह से व्यापक रूप से चुनाव परिणाम प्रभावित हुए हैं।

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टीएमसी का दावा

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष टीएमसी ने दावा कि विधानसभा की 31 सीटों पर भाजपा की जीत का अंतर, एसआईआर के दौरान मतदता सूची से बाहर किए गए लोगों की संख्या से काफी कम था। टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय ने कहा कि कई सीटों पर सूची से हटाए गए नामों की संख्या और हार का अंतर लगभग एक जैसा ही था। वरिष्ठ अधिवक्ता बंदोपाध्याय ने दावा किया कि एक सीट पर टीएमसी उम्मीदवार को महज 862 वोटों के अंतर से हार मिली, जबकि इस सीट से पांच हजार से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए और उनकी अपीलें अब भी लंबित हैं। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी और भाजपा के बीच वोटों का अंतर लगभग 32 लाख था और अपीलीय न्यायाधिकरणों के सामने लगभग 35 लाख अपीलें अभी भी लंबित हैं।

न्यायालय की टिप्पणी

कल्याण बंदोपाध्याय ने शीर्ष अदालत में न्यायमूर्ति बागची द्वारा एसआईआर के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की गइ उस टिप्पणी का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर जीत का अंतर हटाए गए मतदाताओं की संख्या से कम है, तो इस मामले की न्यायिक जाच की जरूरत पड़ सकती है। इसके बाद न्यायमूर्ति बागची ने टीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता बंदोपाध्याय से कहा कि ‘आप नतीजों के बारे में जो कुछ भी कहना चाहते हैं... कि उन पर हटाए गए नामों की वजह से काफी असर पड़ा है (जिन नामों की जांच अभी चल रही है)... उसके लिए आपको अलग से एक अर्जी दाखिल (आवेदन) दायर करना होगा।’

टीएमसी की अपील

टीएमसी ने पीठ के समक्ष यह भी कहा कि हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवज्ञानम ने अपीलीय न्यायाधिकरण के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ‘हम इसमें क्या कर सकते हैं? हम किसी पर जोर जबरदस्ती तो नहीं कर सकते...’ उन्होंने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सूची से हटाए गए लोगों की अपीलों पर जल्द से जल्द फैसला किया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू ने टीएमसी के दावों का विरोध किया और कहा कि यदि परिणाम से शिकायत है तो चुनाव याचिका दाखिल करना चाहिए। टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बंदोपाध्याय ने कोर्ट से यह आदेश जारी करने का अनुरोध किया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हटाए गए नामों को चुनाव याचिका दायर करने का एक आधार माना जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि ‘हम ऐसा आदेश कैसे पारित कर सकते हैं?’ हालांकि शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘यदि इस मामले में कोई उचित अर्जी दाखिल किया जाता है तो उस पर विचार किया जाएगा।

अपीलों का निपटारा

टीएमसी सांसद व वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने शीर्ष अदालत से कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के अपीलों पर जिस तरह से सुनवाई चल रही है, उसे देखते हुए अपीलीय न्यायाधिकरणों को इन अपीलों का निपटारा करने में कम से कम चाल साल लग जाएंगे। इस पर पीठ ने कहा कि सूची से हटाए गए लोगों की अपीलों के लंबित होने के संबंध में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से रिपोर्ट की आवश्यकता है... ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्हें किस समय-सीमा के भीतर निपटाया जा सकता है।

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