किसी भी बड़े दल ने महिलाओं को 33 फीसदी सीटों पर नहीं दिया टिकट
प्रभात कुमार नई दिल्ली। देश के सभी राजनीतिक दल लोकसभा और राज्यों के विधानसभाओं में

प्रभात कुमार नई दिल्ली।देश के सभी राजनीतिक दल लोकसभा और राज्यों के विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की वकालत करते हैं। लेकिन चुनाव में पर्याप्त संख्या में महिलाओं को टिकट देने की बात आती है तो करीब-करीब सभी राजनीतिक दल अपने हाथ खड़े कर देते हैं। असम, केरल, पश्चिम बंगाल के अंकड़े बताते हैं कि चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल ने 33 फीसदी सीटों पर महिलाओं को टिकट नहीं दिया। वर्ष 2023 में, संसद ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन विधेयक को मंजूरी दी थी, जो राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद कानून बन गया।
हालांकि अभी लागू नहीं हुआ है।इसका खुलासा, विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव लड़ रही महिला उम्मीदवारों के आंकड़ों के विश्लेषण से हुआ है। भरतीय राजनीति और चुनाव के बारे में करीब से विश्लेषण करने वाली गैर सरकारी संस्था ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के आंकड़ों से पता चलता है कि एक को सीपीआई (एम) को छोड़कर किसी भी राजनीतिक दल ने विधानसभा में 33 फीसदी सीटों पर महिलाओं को टिकट नहीं दिया है। फिलहाल जिन 5 राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, उनमें से 3 राज्यों यानी असम, केरल और पश्चिम बंगाल के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 294 सीटें हैं और यहां पर 11 फीसदी यानी 167 महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं, जबकि 1308 यानी 89 फीसदी पुरुष उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। पश्चिम बंगाल में चुनाव में टीएमसी ने सबसे अधिक 19 फीसदी यानी 55 महिलाओं को टिकट दिया है। जबकि कांग्रेस ने 13 फीसदी यानी 39 महिलाओं को टिकट दिया है, जबकि भाजपा ने 11 फीसदी से अधिक यानी 33 महिलाओं को टिकट दिया है। इसी तरह वाम दलों ने यहां पर 28 सीटों पर महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है जो करीब 9 फीसदी है। 33 फीसदी के हिसाब से पश्चिम बंगाल में महिलाओं को 97 सीटों पर टिकट मिलना चाहिए, जो किसी भी राजनीतिक दलों ने नहीं किया।यही हाल असम में विधानसभा की कुल 126 सीटें हैं और यहां पर विधानसभा चुनाव में सिर्फ 8 फीसदी यानी 60 महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं, जबकि 92 फीसदी यानी 662 पुरुष उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। यहां पर 99 सीटों पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस ने करीब 13 फीसदी यानी 13 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है। जबकि 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही भाजपा ने महज 7 फीसदी यानी 6 सीटों पर महिलाओं को टिकट दिया है। असम में 22 सीटों पर चुनाव लड़ रही टीएमसी ने 14 फीसदी यानी 3 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है। 18 सीटों पर चुनाव लड़ रही आप ने 17 फीसदी यानी 3 महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा है। 41 सीटों पर चुनाव लड़ रही एसयूसीआई (सी) ने 29 फीसदी यानी 12 महिलाओं को टिकट दिया है।केरल विधानसभा चुनाव में भी किसी भी राजनीतिक दल ने 33 फीसदी सीटों पर महिलाओं को टिकट नहीं किया। कुल 140 सीटों वाली विधानसभा में इस बार 11 फीसदी यानी 92 महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ रही है। जबकि 89 फीसदी यानी 771 पुरुष उम्मीदवार चुनाव में हैं। 85 सीटों पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस ने 8 फीसदी यानी 7 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया है, जबकि 93 सीटों पर चुनाव लड़ रही भाजपा ने 13 यानी 14 फीसदी महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा है। इसी तरह 77 सीटों पर चुनाव लड़ रही सीपीआई (एम) ने 16 फीसदी यानी 12 महिलाओं को टिकट दिया है। जबकि बीएसपी ने 15 फीसदी, आप ने 8 फीसदी और एसयूसीआई (सी) 30 फीसदी सीटों पर महिलाओं को टिकट दिया है।
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