भोजशाला मामला : मंदिर को ढहाकर मस्जिद बनाने का सबूत नहीं : मुस्लिम पक्ष
इंदौर में भोजशाला मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने दावा किया कि मंदिर को ढहाने का कोई सबूत नहीं है। हिंदू पक्ष के अनुसार, भोजशाला परिसर में सरस्वती मंदिर को 1305 में ढहाया गया था। विवादित स्थल को हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष अलग-अलग दृष्टिकोण से देखते हैं। हाईकोर्ट इस मामले पर सुनवाई कर रहा है।

इंदौर, एजेंसी। भोजशाला मामले की सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में मुस्लिम पक्ष के एक याचिकाकर्ता ने गुरुवार को दावा किया कि मंदिर को किसी खास दौर में ढहाकर उस स्थान पर मस्जिद बनाए जाने का कोई भी सबूत नहीं है। याचिकाकर्ता ने भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद के मुकदमे में हिंदू पक्ष के दावे को खारिज करते हुए यह बात कही। हिंदू पक्ष के मुताबिक, धार के परमार राजवंश के राजा भोज द्वारा भोजशाला परिसर में वर्ष 1034 में बनवाया गया सरस्वती मंदिर मध्यकालीन भारत के शासक अलाउद्दीन खिलजी के हुक्म पर 1305 में ढहाया गया था। इसके अवशेषों का वहां मस्जिद के निर्माण में फिर से इस्तेमाल किया गया था।भोजशाला
को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है। हाईकोर्ट की इंदौर पीठ भोजशाला के धार्मिक स्वरूप के विवाद को लेकर दायर चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रही है। मुस्लिम पक्षकारों में शामिल धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी के सामने विस्तृत दलीलें पेश कीं।
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