भोजशाला के फैसले पर बोले मुख्यमंत्री मोहन यादव, सांस्कृतिक विरासत और इतिहास के सम्मान का अहम पल
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उच्च न्यायालय के फैसले पर खुशी व्यक्त की, जिसमें धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर के रूप में मान्यता दी गई। हिन्दू समुदाय ने उत्सव मनाया और आतिशबाजी की। यादव ने भोजशाला की गरिमा को बनाए रखने और भक्तों के पूजा के अधिकार की सुरक्षा का आश्वासन दिया। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी खुशी जताई।

धार (मध्य प्रदेश), एजेंसी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को उच्च न्यायालय के फैसले पर खुशी जताई। कहा कि यह सांस्कृतिक विरासत और इतिहास के सम्मान का अहम पल है। वहीं, हिन्दू पक्ष ने आतिशबाजी और अबीर-गुलाल उड़ाकर खुशियां मनाईं। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार भोजशाला की गरिमा के साथ-साथ राज्य में आपसी सौहार्द और सामाजिक सद्भावना को और मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि एएसआई के संरक्षण और प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और मजबूत होगी। भक्तों के पूजा करने के अधिकार को सुनिश्चित किया जाएगा। केंद्र सरकार को मां वाग्देवी की प्रतिमा को ब्रिटेन से वापस भारत लाने पर विचार करने का निर्देश सराहनीय है।
राज्य सरकार भी इस दिशा में आवश्यक प्रयास करेगी। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि वह इस निर्णय से बेहद खुश हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘माननीय हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर के रूप में मान्यता दी है। धार भोजशाला एक मंदिर है, इसे साबित करने वाले सभी तथ्य पहले से ही साफ थे।’ उधर, अदालत के फैसले के बाद हिन्दू पक्ष में उत्सव का माहौल है।भोज उत्सव समिति के उपाध्यक्ष सुमित चौधरी ने कहा कि हिन्दू पक्ष का दशकों लंबा संघर्ष आज खत्म हो गया है। कहा कि यह जीत उन कार्यकर्ताओं को समर्पित है जिन्होंने 1935 में समिति की नींव रखी थी। उधर, भोजशाला परिसर के बाहर ज्योति मंदिर के पास हिन्दू समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी। कुछ उत्साहित कार्यकर्ताओं ने नाच-गाने के साथ सड़कों पर आतिशबाजी भी की।
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