जब AAP के पूर्व नेता प्रशांत भूषण पर चला था अवमानना केस, आखिर में लगा था 1 रुपये का जुर्माना
दिल्ली शराब घोटाला केस में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू किए जाने का आदेश दिया है। इसके बाद एक बार फिर वरिष्ठ वकील और AAP के पूर्व नेता प्रशांत भूषण का चर्चित Contempt Case चर्चा में आ गया है।

दिल्ली शराब घोटाला केस में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू किए जाने का आदेश दिया है। इसके बाद एक बार फिर वरिष्ठ वकील और AAP के पूर्व नेता प्रशांत भूषण का चर्चित Contempt Case चर्चा में आ गया है। साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को न्यायपालिका पर किए गए ट्वीट्स के मामले में अवमानना का दोषी माना था। हालांकि सजा के तौर पर अदालत ने आखिरी में उन पर सिर्फ 1 रुपये का जुर्माना लगाया था। जानिए 1 रुपये जुर्माना वाले केस की पूरी कहानी।
2020 में दो ट्वीट से शुरू हुआ था अवमाना केस
प्रशांत भूषण पर चले कोर्ट की अवमानना का मामला अगस्त 2020 का है। इसकी शुरुआत प्रशांत भूषण के दो ट्वीट्स से हुई थी, जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (suo motu contempt) लिया था। नीचे दिए गए ट्वीट को अदालत ने CJI की गरिमा और न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला माना था।
सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों ट्वीट्स को लेकर कहा कि ये बयान न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाते हैं और जनता के बीच अदालत की छवि को कमजोर करते हैं। इसके बाद कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही शुरू की।
- पहला ट्वीट (मुख्य न्यायाधीश पर टिप्पणी)
प्रशांत भूषण ने एक ट्वीट में लिखा था- “भविष्य में जब इतिहासकार बीते 6 सालों का विश्लेषण करेंगे और देखेंगे कि भारत में औपचारिक आपातकाल के बिना भी लोकतंत्र को किस प्रकार नष्ट किया गया। तो, वे इस विनाश में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका और खासकर पिछले 4 मुख्य न्यायाधीशों की भूमिका को उल्लेखनीय रूप से पाएंगे।”
- दूसरा ट्वीट (CJI की फोटो पर टिप्पणी)
दूसरे ट्वीट में उन्होंने एक फोटो पर टिप्पणी की थी, जिसमें तत्कालीन CJI एक महंगी बाइक (हार्ले डेविडसन) पर बैठे दिखाई दिए थे। भूषण ने लिखा था- “मुख्य न्यायाधीश ने नागपुर के राजभवन में एक भाजपा नेता की 50 लाख रुपये की मोटरसाइकिल को बिना मास्क या हेलमेट के चलाया। ये ऐसे समय में है, जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को लॉकडाउन मोड में रखा हुआ है और नागरिकों को न्याय तक पहुंचने के लिए उनके मौलिक अधिकार से वंचित कर रहे हैं।”


आखिर में लगा था 1 रुपये का जुर्माना
शुरुआती फैसले में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और तीन साल तक वकालत पर रोक तथा जेल की सजा जैसे विकल्पों की भी चर्चा हुई। हालांकि, अंतिम आदेश में अदालत ने प्रतीकात्मक रूप से 1 रुपये का जुर्माना तय किया, जिसे भरने की अंतिम तिथि 15 सितंबर रखी गई थी। भूषण ने जुर्माना भरने का फैसला किया, लेकिन उन्होंने अपने ट्वीट्स के लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि वे न्यायपालिका की आलोचना के अपने अधिकार पर कायम हैं और किसी दबाव में आकर खेद व्यक्त नहीं करेंगे।
केजरीवाल समेत AAP नेताओं से जुड़ा मामला क्या?
प्रशांत भूषण केस की कहानी के बाद एक नजर ताजा मामले पर भी। दिल्ली शराब घोटाला मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने गुरुवार, 14 मई को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज, विनय मिश्रा और दुर्गेश के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है।
अदालत के मुताबिक, इन नेताओं ने अदालती आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के बजाय सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और लेटर के जरिए न्यायपालिका के खिलाफ दुष्प्रचार किया है। जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह निजी हमला नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्था को डराने की कोशिश थी।




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