दिल्ली दंगा मामले में कपिल मिश्रा को बड़ी राहत, FIR दर्ज करने वाली याचिका कोर्ट ने की खारिज
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को बीजेपी नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ 2020 के दिल्ली दंगों के सिलसिले में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को बीजेपी नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ 2020 के दिल्ली दंगों के सिलसिले में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्वनी पनवार ने यमुना विहार निवासी मोहम्मद इलियास द्वारा दायर इस याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इलियास ने CrPC की धारा 156(3) के तहत कोर्ट से गुहार लगाई थी, जो मजिस्ट्रेट को संज्ञेय अपराधों में एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने का अधिकार देती है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता मोहम्मद इलियास ने आरोप लगाया था कि उन्होंने दंगों के दौरान कपिल मिश्रा और उनके समर्थकों को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कर्दमपुरी में सड़क जाम करते और रेहड़ी-पटरी वालों की गाड़ियां तोड़ते देखा था। याचिका में यह भी दावा किया गया था कि उस समय दिल्ली पुलिस के तत्कालीन डीसीपी भी कपिल मिश्रा के साथ मौजूद थे। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना।
निचली अदालत ने दिए थे जांच के आदेश
इससे पहले एक निचली अदालत ने कपिल मिश्रा की भूमिका की जांच के आदेश दिए थे, लेकिन सत्र न्यायाल ने उस निर्देश को रद्द कर दिया था। वहीं इससे पहले, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने दिल्ली दंगों के पीछे कथित साजिश की दिल्ली पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि पुलिस के इस सिद्धांत को बनाने में कई संदिग्ध धारणाएं, अनुमान और व्याख्याएं शामिल थीं कि दंगे CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों द्वारा रची गई एक पूर्व नियोजित साजिश थी।
हालांकि, सेशन कोर्ट ने फैसला सुनाया कि मजिस्ट्रेट अदालत इस मामले में आगे की जांच का आदेश नहीं दे सकती, क्योंकि दिल्ली पुलिस ने दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश के संबंध में पहले ही एफआईआर दर्ज कर ली थी और कड़कड़डूमा अदालत ने इसका संज्ञान ले लिया था।




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