जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल के साथ संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज को क्यों लपेट लिया
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने शराब घोटाले वाले केस से खुद को अलग करने से पहले आम आदमी पार्टी के 6 नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। केजरीवाल के अलावा मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक और विनय मिश्रा भी इसमें शामिल हैं।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल नई मुश्किलों में घिर गए हैं। कथित शराब घोटाले से जुड़ा केस हाई कोर्ट में जाने के बाद पिछले 2-3 महीने के घटनाक्रम ने उन्हें 'आपराधिक अवमानना की कार्यवाही' के दायरे में ला दिया है। केजरीवाल इस मुसीबत में अकेले नहीं फंसे हैं, बल्कि उनके साथ आम आदमी पार्टी के 6 बड़े नेता घिर गए हैं। सौरभ भारद्वाज और विनय मिश्रा जैसे नेता भी कार्रवाई की जद में आ गए हैं जो शराब घोटाले में आरोपी नहीं हैं। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने गुरुवार को इन नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश देते हुए कहा कि संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और विनय मिश्रा की ओर से अदालत पर की गई टिप्पणियों का जिक्र करते हुए उन्हें अवमानना करने वाला बताया।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 'आप' सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को लेकर कहा कि उन्होंने अदालत को बदनाम करने के लिए सोशलम मीडिया पर कैंपेन चलाया। हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बजाय दूसरा रास्ता चुना। अदालत को डराने और प्रभाव में लाने की कोशिश की गई। यह संदेश दिया गया कि यदि जज ने राजनीतिक अपेक्षा के मुताबिक काम नहीं किया तो बदनाम किया जाएगा। मजाक उड़ाया गया और डराने की कोशिश भी की गई। जज के परिजनों को विवाद में घसीटने की कोशिश की गई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल पर शुरू की गई कार्यवाही का विस्तार से आधार बताया। साथ ही संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और विनय मिश्रा की उन हरकतों का भी जिक्र किया, जिन्हें अदालत ने अवमानना माना है।
संजय सिंह पर क्या कहा?
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने संजय सिंह का के ट्वीट का जिक्र करते हुए कहा, 'मिस्टर सिंह ने केजरीवाल का वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा कि जब एक जज आरएसएस का इवेंट अटेंड करता है, ऐसे जज से कभी न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती है। ऐसे बयान दिए गए जिनका स्पष्ट तौर पर प्रयास यह दिखाना है कि अदालत राजनीतिक रूप से एक विचारधारा के प्रति झुकाव रखती है। यह साफ तौर पर अवमानना करने वाला है और आपराधिक अवमानना है।'
विनय मिश्रा पर क्या कहा?
अदालत ने एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें वह वाराणसी में लेक्चर दे रही थीं। इसके एडिट करके इस तरह दिखाया गया कि वह एक राजनीतिक दल के लिए बोल रही थीं और जब भी उनके कार्यक्रम में जाती हैं प्रमोशन मिल जाता है। जस्टिस सूर्यकांता ने कहा कि ऐसा एक वीडियो पोस्ट किया गया जिसका एक लाख से ज्यादा व्यू था। वाराणसी यूनिवर्सिटी में वर्कशॉप का वीडियो था। अदालत (जस्टिस शर्मा) की ओर से भगवान शिव के संदर्भ में बात की जा रही थी। इसे जानबझूकर एक राजनीतिक दल से जोड़ने की कोसिश की गई। जस्टिस शर्मा ने कहा, 'एडिट किए गए वीडियो से यह छवि बनाने की कोशिश की गई कि जज किसी के प्रभाव में हैं और उनसे प्रमोशन मिला।'
जस्टिस शर्मा ने कहा, 'ऐसे झूठे दावे संजय सिंह ने भी किए और इसी तरह के पोस्ट विनय मिश्रा ने किए। मिश्रा ने भी वही वीडियो पोस्ट किया। इससे अधिक अवमानना क्या हो सकती है?' अदालत ने विनय मिश्रा का एक और पोस्ट पढ़कर सुनाया। जस्टिस शर्मा ने कहा, 'यह आदेश अदालत में पास किया जा रहा है, भाजपा के हेडक्वॉर्टर में नहीं। विनय मिश्रा, मैं आपके खिलाफ अवमानना का ऐक्शन ले रही हैं और यह मेरा जवाब है।'
सौरभ भारद्वाज पर क्या कहा?
अदालत ने एक और वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा, ‘इसे आप के यूट्यूब चैनल और एक्स पर शेयर किया गया। इस अदालत में मामला सूचीबद्ध होने के अगले दिन इसे किया गया। मेरे सामने तब कोई पार्टी नहीं थी, जब इन्होंने ये पोस्ट किया। कांन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा बीजेपी का हाई कोर्ट जज से क्या रिश्ता है, उन्होंने सार्वजनिक रूप से अदालत की सत्यनिष्ठा और निष्पक्षता पर सवाल उठाए। यह पूछना कि एक मौजूदा जज का दल के साथ क्या रिश्ता है, उचित आलोचना नहीं है। यह अवमाननापूर्ण है। मैं आपके ऊपर यह कार्यवाही करती हूं।’




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