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केजरीवाल को जिन जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से दिक्कत, कैसा रहा है उनका सफर

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा 3 दशक से अधिक समय से न्यायपालिका में अपना योगदान दे रही हैं। वह महज 24 वर्ष की आयु में मजिस्ट्रेट बन गईं। 2022 में वह दिल्ली हाई कोर्ट की जज बनीं।

Fri, 1 May 2026 05:44 PMSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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केजरीवाल को जिन जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से दिक्कत, कैसा रहा है उनका सफर

दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा इन दिनों खूब सुर्खियों में हैं। वजह है आम आदमी पार्टी (आप) की ओर से उनके खिलाफ खोला गया मोर्चा। 'आप' के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पहले जज साहिबा के खिलाफ ही कानूनी विकल्प अपनाया और अब सत्याग्रह वाली मुहिम छेड़ दी है। केजरीवाल और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं ने उन पर शक और सवाल खड़े करते हुए कहा है कि उन्हें जस्टिस शर्मा की अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।

दिल्ली हाई कोर्ट की जज सस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा तीन दशक से अधिक समय से न्यायपालिका में अपना योगदान दे रही हैं। 24 साल की उम्र में ही मजिस्ट्रेट का पद हासिल करने वालीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा अपने 35वें जन्मदिन पर सेशंस जज बन गईं। दिल्ली यूनिवर्सिटी से इंग्लिश में बीए (ऑनर्स) करने वाली जस्टिस स्वरण कांता शर्मा को दौलत राम कॉलेज का बेस्ट ऑल राउंड स्टूडेंट भी चुना गया था। उन्होंने 1991 में एलएलएम और 2004 में एलएलएम की डिग्री ली। वह मार्केटिंग मैनेजमेंट,एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशंस में डिप्लोमा किया है। वह पीएडी की डिग्री भी हासिल कर चुकी हैं।

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जस्टिस शर्मा प्रशिक्षित न्यायिक मध्यस्थ भी हैं और मध्यस्थता के जरिए उन्होंने कई केसों का निपटारा कराया है। अलग-अलग समय में वह तीस हजारी, पटियाला हाउस और रोहिणी कोर्ट में महिला कर्मचारियों की यौन शोषण से जुड़ी शिकायतों का निपटारा करने वाली समिति की अध्यक्ष रही हैं। दिल्ली के जिला अदालतों में कार्यकाल के दौरान वह कई सिविल और क्रिमिनल कोर्ट, स्पेशल जज (सीबीआई), फैमिली कोर्ट प्रिंसिपल जज, मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्राइब्यूनल और विशेष अदालतों में जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं।

नवंबर 2019 में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को प्रिंसिपल एंड सेशंस जज बनाया गया। मार्च 2022 में वह राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रिंसिपल एंड सेशंस जज, सह स्पेशल जज (सीबीआई) बनीं। 28 मार्च 2022 को उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट जज के रूप में पदोन्नति मिली। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कई किताबें भी लिख चुकी हैं।

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क्यों केजरीवाल को उनसे दिक्कत

दरअसल, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कथित शराब घोटाले से जुड़े उस केस की सुनवाई कर रही हैं जिसमें अरविंद केजरीवाल समेत आप के कई नेता आरोपी बनाए गए। फरवरी के अंत में ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था और सीबीआई को फटकार लगाई थी। सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है और इसे जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में सूचीबद्ध किया गया।

अरविंद केजरीवाल चाहते थे कि इस केस को किसी और बेंच को ट्रांसफर किया जाए। उन्होंने ऐसी मांग करते हुए चीफ जस्टिस को लेटर भी लिखा। लेकिन मांग खारिज हो जाने के बाद उन्होंने रिक्यूजल याचिका दायर की। केजरीवाल ने जज पर हितों को टकराव और आरएसएस से जुड़े संगठन के कार्यक्रम में जाने के आरोप लगाते हुए उनपर आशंकाएं जाहिर कीं। हालांकि, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल की सभी दलीलों का विस्तार से जवाब देते हुए फैसला दिया कि वह इस केस की सुनवाई करती रहेंगी। इसके बाद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता की अदालत का बहिष्कार करते हुए इसे सत्याग्रह का नाम दिया है।

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