JNU प्रशासन ने लगाया जुर्माना, अब 59 हजार का चंदा जुटा रहे छात्र; AISA कर रही क्राउडफंडिंग
AISA की जेएनयू इकाई ने मंगलवार को पब्लिक से अपील करते हुए लोगों से 59 हजार रुपये जुटाने की मांग की है। छात्र संगठन का कहना है कि यह रकम छात्रों पर लगाए गए जुर्माने चुकाने और लीगल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के लिए जुटाई जा रही है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े छात्र नेताओं ने प्रशासन द्वारा लगाए गए जुर्मानों के खिलाफ क्राउडफंडिंग अभियान (चंदा मांग) शुरू किया है। AISA की जेएनयू इकाई ने मंगलवार को पब्लिक से अपील करते हुए लोगों से 59 हजार रुपये जुटाने की मांग की है। छात्र संगठन का कहना है कि यह रकम छात्रों पर लगाए गए जुर्माने चुकाने और लीगल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के लिए जुटाई जा रही है।
AISA ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के लिए सजा दी है। संगठन के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में जारी नोटिसों के जरिए तत्कालीन जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) अध्यक्ष नितीश कुमार और पूर्व AISA जेएनयू अध्यक्ष रणविजय पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। यह कार्रवाई पीएचडी स्कॉलर्स को जारी किए गए बेदखली नोटिसों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद की गई।
AISA के अनुसार, इन विरोध प्रदर्शनों के तहत छात्रों ने 16 दिनों की भूख हड़ताल की थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीएचडी स्कॉलर्स को थीसिस जमा करने तक हॉस्टल में रहने की अनुमति देने पर सहमति जताई थी। छात्र संगठन का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह अहिंसक और लोकतांत्रिक था।
पीटीआई से बातचीत में नितीश कुमार ने बताया कि उन पर कुल 29 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने कहा, “ये आर्थिक दंड असहमति की आवाज को दबाने के लिए लगाए जा रहे हैं। इस तरह के कदम हमें अन्याय के खिलाफ बोलने से रोक नहीं सकते।”
अक्टूबर में हुई अलग-अलग कार्रवाइयों में AISA के छात्र कार्यकर्ता मणिकांत पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया और उन्हें एक सेमेस्टर के लिए निलंबित कर दिया गया। वहीं, नितीश कुमार पर एक अन्य मामले में 19 हजार रुपये का जुर्माना और AISA कार्यकर्ता महबूब पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
ये दंड कैंपस में फेसियल रिकग्निशन तकनीक लागू करने के विरोध और सेंट्रल लाइब्रेरी में बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद लगाए गए थे। छात्र संगठनों का आरोप है कि प्रशासन आर्थिक दंड और निलंबन के जरिए “असहमति को अपराध की तरह पेश” कर रहा है।
AISA नेताओं का कहना है कि लगाए गए किसी भी जुर्माने का संबंध न तो हिंसा से है और न ही संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से। उनका दावा है कि सभी कार्रवाई शांतिपूर्ण विरोध के कारण की गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।




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