जनकपुरी बाइकर मौत मामला : दिल्ली पुलिस ने फरार कॉन्ट्रैक्टर हिमांशु गुप्ता को उदयपुर से दबोचा
दिल्ली के जनकपुरी में पिछले महीने सड़क पर खोदे गए गड्डे में गिरने से हुई एक बाइकर की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने मुख्य कॉन्ट्रैक्टर हिमांशु गुप्ता को आज राजस्थान के उदयपुर से पकड़ा है। घटना के बाद से फरार चल रहा हिमांशु उदयपुर में ही छुपा हुआ था।

दिल्ली के जनकपुरी में पिछले महीने सड़क पर खोदे गए गड्डे में गिरने से हुई एक बाइकर की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने मुख्य कॉन्ट्रैक्टर हिमांशु गुप्ता को आज राजस्थान के उदयपुर से धर दबोचा। घटना के बाद से फरार चल रहा हिमांशु उदयपुर में ही छुपा हुआ था।
दिल्ली पुलिस के पश्चिमी जिले की एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वायड (AATS) के इंस्पेक्टर मुकेश मीणा की टीम को हिमांशु गुप्ता के उदयपुर में होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने तुरंत इस कर कार्रवाई करते हुए हिमांशु को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद अब उसे दिल्ली लाया जा रहा है।
अदालत ने जारी के किए थे गिरफ्तारी वारंट
अदालत ने हिमांशु समेत दो ठेकेदारों के खिलाफ गिरफ्तारी वांरट जारी किए थे। इस घटना के संबंध में अब तक कई गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं, जबकि दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के तीन अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया।
बता दें कि जनकपुरी में 5 फरवरी 2026 की रात दिल्ली जल बोर्ड के एक खुले 20 फीट गहरे सीवर के गड्ढे में गिरने से बाइक सवार 25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत हो गई थी। कमल ध्यानी रोहिणी स्थित एक निजी बैंक में जॉब करता था।
हाईकोर्ट का ठेकेदारों को अग्रिम जमानत देने से इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने 25 फरवरी को जनकपुरी में एक गड्ढे में गिरने से 25 वर्षीय एक बाइकर की मौत के मामले में दो ठेकेदारों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों को मौत के जाल में बदलने नहीं दिया जा सकता।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा था कि ठेके के अनुसार, हिमांशु गुप्ता और कवीश गुप्ता का स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का कर्तव्य था, जिसमें किसी व्यक्ति या वाहन के गड्ढे में गिरने की स्थिति में आवश्यक बचाव उपकरण की उपलब्धता, प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं का प्रावधान और पुलिस एवं चिकित्सा अधिकारियों को तुरंत सूचना देना शामिल है। जज ने कहा कि जब लगभग 20 फुट लंबा, 13 फुट चौड़ा और 14 फुट गहरा गड्ढा व्यस्त सड़क के बीचोंबीच कार्य परमिट की शर्तों, टेंडर की शर्तों और ट्रैफिक पुलिस की शर्तों का पूरी तरह से उल्लंघन करते हुए, बिना किसी इंडिकेटर, बैरिकेड या सुरक्षा उपायों के खोदा गया, तो एक "अप्रिय घटना" "अपरिहार्य" थी।
हाईकोर्ट ने की थी सख्त टिप्पणी
बेंच ने कहा, ''अब समय आ गया है कि दिल्ली के नागरिकों को हल्के में न लिया जाए और उनके जीवन को महत्व दिया जाए। इस तरह की घटनाओं को केवल ठेके की शर्तों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। इस अदालत की राय में, सार्वजनिक सड़कों को मौत का जाल नहीं बनने दिया जा जा सकता।''
अदालत ने अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा, ''समुदाय को यह संदेश भी जाना चाहिए कि किसी व्यक्ति या संस्था को सार्वजनिक ठेका दिए जाने पर वह जिम्मेदारी के साथ इसे पूरा करे और यदि ऐसी जिम्मेदारी नहीं निभायी जाती है, तो जवाबदेही और कानून का पालन होना चाहिए।''
न्यायाधीश ने कहा कि इतना कहना ही काफी है कि व्यस्त सड़कों पर बुनियादी सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना खुदाई का काम करते समय आम जनता के अनमोल जीवन को भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
(भाषा के इनपुट के साथ)




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