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ED गवाह या संदिग्ध के तौर पर बुलाए शख्स को भेज सकती है वारंट? दिल्ली HC ने साफ की स्थिति

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग जांच में सिर्फ गवाह या संदिग्ध के तौर पर बुलाए गए व्यक्ति के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी नहीं किए जा सकते, जब तक कि उस व्यक्ति पर गैर-जमानती अपराध का आरोप न हो जाए।

Sat, 27 Dec 2025 02:18 PMPraveen Sharma लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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ED गवाह या संदिग्ध के तौर पर बुलाए शख्स को भेज सकती है वारंट? दिल्ली HC ने साफ की स्थिति

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग जांच में सिर्फ गवाह या संदिग्ध के तौर पर बुलाए गए व्यक्ति के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी नहीं किए जा सकते, जब तक कि उस व्यक्ति पर गैर-जमानती अपराध का आरोप न हो जाए।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस अमित शर्मा की बेंच ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा लंदन के बिजनेसमैन सचिन देव दुग्गल के खिलाफ जारी किए गए गैर जमानती वारंट को रद्द कर दिया।

ईडी ने दुग्गल को इस आधार पर गैर जमानती वारंट जारी करने की मांग की थी कि वह मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 50 के तहत जारी समन के जवाब में पेश नहीं हुए।

दूसरी ओर, याचिकाकर्ता दुग्गल ने तर्क दिया कि वह न तो आरोपी थे और न ही समन विदेश में रहने वाले व्यक्तियों पर लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कभी तामील किए गए थे।

हाईकोर्ट ने दुग्गल की बात से सहमति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को सिर्फ पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा था, न कि किसी शेड्यूल्ड या मनी लॉन्ड्रिंग अपराध में आरोपी के तौर पर

''इसमें कोई शक नहीं कि ऐसे व्यक्ति के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए जा सकते हैं, जो जांच से बच रहा है और जिसे प्रॉसिक्यूशन की शिकायत में औपचारिक रूप से आरोपी नहीं बनाया गया है। हालांकि, ऐसे व्यक्तियों को सीआरपीसी की धारा 73 के मकसद से गैर जमानती अपराध करने और गिरफ्तारी से बचने वाले आरोपी के तौर पर पेश किया जाना चाहिए। मौजूदा मामले के अजीबोगरीब तथ्यों में, जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता को 'गवाह' के तौर पर दिखाया है।''

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी किए गए गैर जमानती वारंट को रद्द कर दिया और साफ किया कि ईडी कानून के अनुसार नए सिरे से कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।

आखिर में कोर्ट ने कहा, "जांच में मदद के लिए गैर-जमानती वारंट जारी करने की शक्ति पर कोई विवाद नहीं है। हालांकि, सीआरपीसी की धारा 73 के अनुसार गैर-जमानती वारंट जारी करने की स्पष्ट शर्तें पवित्र और अनिवार्य हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।"

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