Pepsi Sharma Death : हरियाणवी रागिनी सिंगर पेप्सी शर्मा की हार्ट अटैक से मौत, स्टेज पर सपना चौधरी संग हिट थी जोड़ी
Pepsi Sharma Death : हरियाणवी सिंगर पेप्सी शर्मा का आज सुबह निधन हो गया। पेप्सी शर्मा को सुबह सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। वह अमरोहा जिले के पतला गांव के रहने वाले थे।

हरियाणवी लोक संगीत जगत से आज एक बुरी और दुखद खबर सामने आई है। हरियाणवी रागिनी कलाकार पेप्सी शर्मा का सोमवार सुबह कथित तौर पर हार्ट अटैक से आकस्मिक निधन हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेप्सी शर्मा को सीने में दर्द की शिकायत के बाद तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
रागिनी जगत के लोकप्रिय कलाकार पेप्सी शर्मा के निधन से हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोक संगीत परंपरा की एक सशक्त आवाज आज हमेशा के लिए खामोश हो गई। पेप्सी शर्मा के आकस्मिक निधन से लोकसंगीत प्रेमियों, कलाकारों और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन को क्षेत्रीय लोक संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
सपना चौधरी संग स्टेज पर हिट थी जोड़ी
रागनी जगत में उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिग बॉस फेम लोक कलाकार सपना चौधरी के साथ उनकी जुगलबंदी वाली रागनी मुकाबलों को देखने और सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़ते थे। दोनों कलाकारों की प्रस्तुतियां दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहती थीं।
अमरोहा जिले के पतला गांव के रहने वाले थे पेप्सी
पेप्सी शर्मा ने उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के पतला गांव के रहने वाले थे। उन्होंने कई सालों तक तक अपनी दमदार गायकी और विशिष्ट प्रस्तुति शैली के माध्यम से गांवों की चौपालों, मेलों और सांस्कृतिक आयोजनों में लोकजीवन की भावनाओं को स्वर दिया। उनकी रागनियां ग्रामीण समाज की संवेदनाओं, किसानों के संघर्ष, पारिवारिक मूल्यों और लोकजीवन की सादगी का जीवंत चित्र प्रस्तुत करती थीं।
प्रशंसकों में भारी शोक
पश्चिमी उत्तर प्रदेश ग्रामीण रागिनी आयोजक संस्था ने दिवंगत कलाकार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर रागिनी गायक सुभाष खटाना ने कहा कि पेप्सी शर्मा की गायकी में केवल सुर और ताल ही नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की मिट्टी की सोंधी महक, गांव का दर्द, किसानों का संघर्ष और रिश्तों की आत्मीयता भी सुनाई देती थी। उन्होंने कहा कि पेप्सी शर्मा केवल एक गायक नहीं, बल्कि लोक संस्कृति के सच्चे संवाहक थे।
श्रद्धांजलि सभा में मौजूद कलाकारों और आयोजकों ने कहा कि कलाकार कभी वास्तव में विदा नहीं होते, उनकी कला पीढ़ियों तक जीवित रहती है। हरियाणवी लोक परंपरा की प्रसिद्ध पंक्ति-"नाम रहैगा नेक कमाई का, तन तो मिट्टी हो जावेगा"-पेप्सी शर्मा के जीवन और योगदान पर पूरी तरह चरितार्थ होती है।
रागिनी मंचों से उनकी भौतिक उपस्थिति भले समाप्त हो गई हो, लेकिन उनकी बुलंद आवाज, विशिष्ट गायन शैली और लोक संस्कृति के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। उनके निधन से लोक संगीत जगत ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।




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