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गुरुग्राम में हिंसक हुआ कर्मचारियों का प्रदर्शन, पुलिस की बाइक फूंकी; एक वर्कर की हालत चिंताजनक

गुरुग्राम के आईएमटी मानेसर में चल रहा कर्मचारियों का आंदोलन गुरुवार को हिंसक संघर्ष में बदल गया। काम पर वापस लौटने की चेतावनी के बावजूद प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को जब पुलिस ने खदेड़ने की कोशिश की तो स्थिति बेकाबू हो गई। पुलिस के लाठीचार्ज में करीब 20 कर्मचारी घायल हुए हैं। 

Thu, 9 April 2026 01:56 PMSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, गौरव चौधरी/गुरुग्राम
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गुरुग्राम में हिंसक हुआ कर्मचारियों का प्रदर्शन, पुलिस की बाइक फूंकी; एक वर्कर की हालत चिंताजनक

गुरुग्राम के आईएमटी मानेसर में चल रहा कर्मचारियों का आंदोलन गुरुवार को हिंसक संघर्ष में बदल गया। काम पर वापस लौटने की चेतावनी के बावजूद प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को जब पुलिस ने खदेड़ने की कोशिश की तो स्थिति बेकाबू हो गई। पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग और लाठीचार्ज में करीब 20 कर्मचारी घायल हुए हैं। इनमें से एक कर्मचारी के सिर पर गंभीर चोट आई है।

अल्टीमेटम मानने से इनकार

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले कई दिनों से हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने प्रशासन के काम पर लौटने के अल्टीमेटम को मानने से इनकार कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने जब धरना स्थल खाली कराने का प्रयास किया तो प्रदर्शनकारी उग्र हो गए।

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एक कर्मचारी की हालत चिंताजनक

पुलिस ने कर्मचारियों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियां भांजी। इसके जवाब में प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया। इस दौरान गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की एक मोटरसाइकिल को आग के हवाले कर दिया। पुलिस की इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल में भी तोड़फोड़ की । पुलिस-कर्मचारियों के बीच हुए संघर्ष में 20 कर्मचारियों को चोटें आई हैं। सिर फटने के कारण एक कर्मचारी की हालत चिंताजनक बनी हुई है।

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पुलिस की सफाई

पुलिस प्रशासन का कहना है कि उन्होंने बार-बार शांतिपूर्ण तरीके से कर्मचारियों से हटने की अपील की थी। बीएनएस की धारा 163 लागू होने के बावजूद भीड़ ने कानून हाथ में लिया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए न्यूनतम बल का प्रयोग करना पड़ा।

कर्मचारियों का आरोप

हड़ताली कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले कई साल से उनकी सैलरी में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। आठ-आठ घंटे के मात्र 12 हजार रुपए दिए जाते है, उसमें भी नियम बताकर कई कटौतियां कर ली जाती हैं। न्यूनतम मजदूरी, ओवरटाइम भुगतान, सुरक्षा और स्थायीकरण जैसी मांगें वर्षों से लंबित हैं। यह उनकी हक की लड़ाई है।

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कर्मचारी संघ की चेतावनी

दूसरी ओर, कर्मचारी संगठनों ने पुलिस की इस कार्रवाई को दमनकारी करार दिया है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसा में बदलने की जिम्मेदारी प्रशासन की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा।

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