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यमुना सिटी के 2 सेक्टरों में 1500 आवंटियों को प्लॉट देने का रास्ता साफ, किसानों की याचिकाएं खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2009 के भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली ग्रेटर नोएडा के 14 किसानों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इससे यमुना सिटी के सेक्टर-18 और 20 में 1500 से अधिक आवंटियों को आवासीय भूखंड मिलने का रास्ता साफ हो गया है। 

Mon, 12 Jan 2026 07:51 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, ग्रेटर नोएडा
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यमुना सिटी के 2 सेक्टरों में 1500 आवंटियों को प्लॉट देने का रास्ता साफ, किसानों की याचिकाएं खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2009 के भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली ग्रेटर नोएडा के 14 किसानों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इससे यमुना सिटी के सेक्टर-18 और 20 में 1500 से अधिक आवंटियों को आवासीय भूखंड मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इन सेक्टरों में सड़कों समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों को भी गति मिलेगी। ये कार्य लंबे समय से अटके पड़े थे।

पारसौल, रबूपुरा, निलोनी शाहपुर, चांदपुर और अचैयपुर समेत अन्य गांव के किसानों ने यमुना विकास प्राधिकरण क्षेत्र में वर्ष 2009 के भूमि अधिग्रहण को गलत बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में 6 जनवरी को जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की बेंच ने महिपाल समेत अन्य किसानों की 14 याचिकाओं को खारिज कर दिया। इससे स्पष्ट हो गया है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह वैध थी और पहले ही उच्चतम स्तर पर इस बारे में निर्णय हो चुका था। यह भूमि वर्ष 2009 से 2011 के बीच भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के तहत ली गई थी।

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सरकार ने विकास के लिए आपातकालीन प्रावधान लागू किया था। ये गांव सेक्टर-18 और 20 के हैं, जहां पहली आवासीय भूखंड की योजना निकाली गई थी। कोर्ट में विचाराधीन मामले के चलते सेक्टर-20 के पाकेट के, एल, एस समेत कई जगह पर आवंटियों को करीब 16 वर्ष बाद भी भूखंड नहीं मिल पाए हैं। इन सेक्टरों में अब भी अधिकतर सड़कें अधूरी पड़ी हैं। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर पहले ही फैसले हो चुके हैं, इसलिए इसे दोबारा खोलने का कोई कारण नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अगर किसी मामले में किसी अंतरिम आदेश के कारण पहले मुआवजा तय नहीं हुआ है, तो संबंधित प्राधिकरण को कानून के अनुसार प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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किसानों का यह था आरोप

किसानों का कहना था कि वे जमीन के मालिक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राधिकरण ने बिना आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिए उनकी जमीन ले ली। आरोप है कि अधिग्रहित भूमि में कुछ हिस्सा आबादी का भी शामिल है, जहां घर बने थे और पशुपालन होता था। यह आरोप भी लगाया गया कि कई जगह जमीन का कब्जा ठीक से नहीं लिया गया या प्राधिकरण को सौंपा नहीं गया।

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यीडा ने पेश किए दस्तावेज

यमुना प्राधिकरण (यीडा) ने अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए कोर्ट को बताया कि यह अधिग्रहण यमुना सिटी के नियोजित विकास के लिए जरूरी था। जमीन पर कब्जा ले लिया गया और सभी मामलों में मुआवजे का भुगतान भी तय किया जा चुका है। प्राधिकरण ने कोर्ट में गांव-वार अधिग्रहण की अधिसूचनाएं, कब्जा लेने की तारीखें और मुआवजा तय होने की जानकारी पेश की। साथ ही बताया कि इसी अधिग्रहण को लेकर पहले भी कई याचिकाएं दाखिल हुई थीं, जिन्हें अदालत खारिज कर चुकी है और आपातकालीन प्रावधान को सही ठहराया जा चुका है।

30 हजार भूखंड आवंटित हो चुके

यमुना प्राधिकरण वर्ष 2009 से अब तक करीब नौ विभिन्न आवासीय भूखंड योजना के तहत अलग-अलग सेक्टर में 30,011 भूखंडों का आवंटन कर चुका है। वर्ष 2009 में पहली आवासीय भूखंड योजना के तहत प्राधिकरण ने 20,406 भूखंड आवंटित किए थे। शेष 9605 अन्य योजना के तहत आवंटित किए गए। कुल 30011 भूखंड में से 16,562 की चेकलिस्ट जारी हो चुकी है। इनमें 12 हजार की रजिस्ट्री हो चुकी है। हालांकि, भूमि की उपलब्धता समेत अन्य कारणों से शेष 13,449 भूखंडों की अब तक चेकलिस्ट जारी नहीं हो पाई है।

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1193 आवंटी कंप्लीशन सर्टिफिकेट ले चुके

सेक्टर-18 और 20 में अब तक करीब 1193 आवंटी मकान बनाने के बाद कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त कर चुके हैं, यानी इन लोगों ने सेक्टरों में अपने मकान बना लिए हैं या फिर 30 प्रतिशत तक निर्माण कर लिया है। वहीं, करीब 1731 आवंटियों ने आवेदन किया हुआ है। खास बात यह है कि सबसे अधिक 1093 मकान 300 वर्गमीटर के भूखंड पर बने हैं।

शैलेंद्र भाटिया, एसीईओ यीडा, ''हाईकोर्ट के आदेश के बाद आवासीय सेक्टर-18 और 20 में 16 वर्षों से इंतजार कर रहे 1500 आवंटियों को उनके भूखंड पर कब्जा मिलने का रास्ता खुल गया है। सेक्टरों में अन्य विकास कार्य भी पूरे किए जा सकेंगे।''

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