दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में कड़ी सुरक्षा के बीच हुई जुमे की नमाज, कारोबारियों ने प्रशासन से की एक अपील
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा के उपाय पूरी तरह से एहतियाती थे और दोहराया कि किसी भी मस्जिद में शुक्रवार की नमाज पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। उन्होंने कहा कि स्थिति शांतिपूर्ण और नियंत्रण में है।

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में बुधवार की रात हुए बवाल के बाद भारी पुलिस तैनाती, ड्रोन निगरानी और बैरिकेडिंग के बीच यहां स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद में शुक्रवार की नमाज अदा की गई। इस दौरान इलाके में किसी भी तरह के हंगामे को रोकने के लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 लागू करते हुए लोगों के जमा होने पर रोक लगा दी गई थी। साथ ही सुरक्षा कारणों से किसी भी तरह की असुविधा से बचने के लिए दिल्ली पुलिस ने स्थानीय लोगों से घर पर ही नमाज़ पढ़ने की अपील भी की थी। इस दौरान तोड़फोड़ वाली जगह से मलबा हटाने का काम भी साथ-साथ जारी रहा। उधर दो दिन पहले हुए बवाल के बाद से इलाके का बाजार बंद है, जिससे परेशान व्यापारियों ने अधिकारियों से सामान्य कारोबारी गतिविधियां बहाल करने का आग्रह किया है और कहा कि लंबे समय तक पाबंदियों से उन्हें काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
निवासियों ने बताया कि सुरक्षाकर्मी रिहायशी गलियों के अंदर तैनात थे, इसलिए लोग दबी आवाज़ में बात कर रहे थे। आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कई जगहों पर बैरिकेड लगाए गए थे, जिससे पड़ोस में सावधानी का माहौल और बढ़ गया था। भारी सुरक्षा और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद, स्थानीय लोगों ने कहा कि नमाज़ अदा करने पर कोई पाबंदी नहीं थी और स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही।
इससे पहले बुधवार को दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा मस्जिद के पास स्थित अतिक्रमण को हटाने के दौरान यहां जमकर पत्थरबाज़ी हुई थी। जिसके बाद यहां जुमे की नमाज को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने मस्जिद के बाहर और आस-पास के इलाकों में 1,000 से ज़्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए थे। इसके अलावा, किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास पैरामिलिट्री फ़ोर्स और दंगा-रोधी गाड़ियां भी तैनात की गई थीं।
जुमे की नमाज में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के मस्जिद में आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को न केवल मस्जिदों के पास, बल्कि संकरी गलियों और मुख्य चौराहों पर भी तैनात किया गया था, और वरिष्ठ अधिकारी जमीन पर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे थे। इसके अलावा पुलिस के ड्रोन भी इलाके में मंडरा रहे थे और पुलिस CCTV कैमरों की मदद से भी लोगों की आवाजाही पर नजर रख रही थी।
माहौल में तनाव को देखते हुए कई स्थानीय लोगों ने इलाके की बड़ी मस्जिदों के बजाय अपने घरों के पास की मस्जिदों में जाना पसंद किया। इस दौरान 43 साल के एक व्यापारी शाहनवाज ने कहा, 'हमने अपने घर के पास की मस्जिद में नमाज़ अदा की। फैज़-ए-इलाही मस्जिद जाने पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन ज़ाहिर है कि हाल ही में जो हुआ, उसकी वजह से लोग सतर्क हैं।' उन्होंने PTI को बताया, 'लोग बेवजह जोखिम नहीं लेना चाहते, इसलिए वे वहीं नमाज़ पढ़ रहे हैं जहां उन्हें ज़्यादा आराम महसूस हो रहा है।'
शाहनावाज ने कहा कि दुकानदार और स्थानीय प्रतिष्ठान इस स्थिति का खामियाजा भुगत रहे हैं। शाहनवाज ने सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील करते हुए कहा, 'हमारी दुकानें कई दिनों से बंद हैं और इससे हमें नुकसान हो रहा है। हमारे जैसे दिहाड़ी मज़दूर, छोटे व्यापारी और दुकानदार रोज़ाना की बिक्री पर निर्भर हैं। कुछ बदमाशों ने कुछ गलत किया और अब पूरा इलाका इसकी कीमत चुका रहा है।'
एक अन्य स्थानीय दुकानदार ने कहा कि मस्जिद तक पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं हुई, हालांकि पुलिस कड़ी जांच कर रही थी। उन्होंने कहा, ‘हमें शुक्रवार की नमाज़ अदा करने जाने से नहीं रोका गया। पुलिसकर्मियों ने मुझे रास्ते में दो बार रोका और पूछा कि मैं कहां जा रहा हूं। जब मैंने उन्हें बताया कि मैं नमाज़ के लिए मस्जिद जा रहा हूं, तो उन्होंने मुझे तुरंत जाने दिया।’
तुर्कमान गेट पर हुई पत्थरबाजी की घटना के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले बुधवार की रात उस वक्त दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में हिंसा भड़क गई, जब कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की मुहिम दौरान स्थानीय लोगों ने पुलिस पर पत्थरबाजी कर दी थी। हिंसा में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए थे, जिसके बाद अधिकारियों ने आंसू गैस के गोले छोड़ते हुए स्थिति को काबू में किया था।




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