फरीदाबाद की नीमका जेल में भूख हड़ताल पर बैठे 40 से ज्यादा कैदी, फोन कॉल की संख्या घटाने पर भड़का गुस्सा
अधिकारियों ने उन कैदियों को धमकाते हुए यह तक कह दिया कि अगर किसी ने इस कदम के खिलाफ या जेल अधिकारियों के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें बाहर नहीं जाने दिया जाएगा और उन्हें बैरक में बंद कर दिया जाएगा।

हरियाणा के फरीदाबाद की नीमका जेल में बीते दिनों हुई एक आतंकी की हत्या के बाद जेल प्रशासन ने ऐसा कुछ फैसला ले लिया, कि जिसके विरोध में 40 से ज्यादा कैदी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। दरअसल कैदियों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि उन्हें अबतक हफ्ते में तीन बार अपने घरवालों से जो बात करने की अनुमति दी जाती थी, उसे घटाकर दो बार कर दिया गया है। सबसे खास बात तो यह है कि एक तो उन्हें इसके पीछे की वजह भी नहीं बताई गई, साथ ही जब कुछ कैदी इस बारे में बात करने गए तो उनके साथ गाली-गलौज करते हुए उन्हें सजा देने तक की धमकी दे दी गई।
कैदियों ने इस बारे में एक नोट जारी करते हुए अपनी शिकायतें बताईं हैं, जो कि शनिवार को सोशल मीडिया पर ऑनलाइन सामने आया। नोट में उन्हें बताया गया कि कुछ दिन पहले तक उन्हें सप्ताह में तीन दिन अपने घर फोन करने की इजाजत थी, जिसे घटाकर बिना किसी वजह के घटाकर अब दो दिन कर दिया गया था। कैदियों ने नोट में आगे बताया कि जब कुछ कैदी इस बदलाव का कारण पूछने गए, तो जेल अधिकारियों ने कथित तौर पर उनके साथ गाली-गलौज की।
यहां तक कि अधिकारियों ने उन कैदियों को धमकाते हुए यह तक कह दिया कि अगर किसी ने इस कदम के खिलाफ या जेल अधिकारियों के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें बाहर नहीं जाने दिया जाएगा और उन्हें बैरक में बंद कर दिया जाएगा। इसके आगे कैदियों ने उनके साथ बुरा बर्ताव होने और उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने की बात भी बताई।
इसके आगे नोट में लिखा था, 'अगर हमें कुछ होता है, तो इसके लिए जेल प्रशासन जिम्मेदार होगा। क्योंकि उन्होंने हमें जेल में लगे CCTV बंद करके पिटाई करने की धमकी भी दी है।'
बता दें कि जेल प्रशासन ने यह फैसला हाल ही में नीमका जेल में हुई उस वारदात के बाद लिया है, जिसमें राम मंदिर पर हमला करने की साजिश रचने के आरोपी एक कैदी को एक अन्य कैदी ने उसकी सेल में मार डाला था, जिसके बाद जेल में सुरक्षा इंतजामों को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके बाद कुछ जेल अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया था और फिलहाल वारदात की जांच चल रही है। उधर इस मामले में प्रतिक्रिया लेने के लिए जेल सुपरिटेंडेंट संजय बांगर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।




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