अफगानी शरणार्थियों के भी बना दिए फर्जी पासपोर्ट, नोएडा-गाजियाबाद में 5 आरोपी जेल भेजे
नोएडा में फर्जी दस्तावेजों पर बने 22 पासपोर्ट मामले की जांच अब IB और ATS कर रही है। इसमें अफगानी शरणार्थियों का नाम आने के बाद केस क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है और दोषी कर्मियों पर कार्रवाई जारी है।

केंद्रीय जांच एजेंसियों ने फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच शुरू कर दी है। आईबी, एटीएस नोएडा और एलआईयू के अधिकारियों ने गिरफ्तार पांच आरोपियों से सोमवार को तीन घंटे तक पूछताछ की। जांच में खुलासा हुआ है कि जिन 22 लोगों के फर्जी पासपोर्ट बनाए गए, उनमें अफगानिस्तानी शरणार्थी मां-बेटे भी हैं।
चार नंबरों का किया इस्तेमाल
अब तक की जांच में पता चला है कि पासपोर्ट बनवाने के लिए एक नहीं, बल्कि चार मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया। फर्जी पासपोर्ट बनवाने की बात सामने आने के बाद सोमवार को नोएडा एटीएस, आईबी और एलआईयू के अधिकारियों ने गिरफ्तार दलाल विवेक गांधी और प्रकाश सुब्बा, डाकिया अरुण कुमार, अफगानिस्तान से आई शरणार्थी महिला सावंतकौर और उसके बेटे अमनदीप सिंह से भोजपुर थाने में पूछताछ की। अधिकारियों ने यह जानने का प्रयास किया कि पासपोर्ट किस मकसद से बनवाए गए। एजेंसियों की जांच विदेशी कनेक्शन पर भी टिकी है।
एड्रेस भी निकले फर्जी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरोपियों ने सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों को कई अहम जानकारी दी है। पुलिस ने बताया कि 22 पासपोर्ट के लिए आवदेन हुआ था, इनमें से एक मोबाइल नंबर पर 13, दूसरे से छह, तीसरे से दो और चौथे नंबर से एक पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया। पासपोर्ट बनावाने के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर फर्जी दस्तावेजों से बनवाए गए आधार कार्ड से लिए गए। फर्जी दस्तावेज लगाकर गांव त्योड़ी बिस्वा 7,भोजपुर और सैदपुर के पते पर पासपोर्ट जारी किए गए। पासपोर्ट में जिनके पते दिखाए गए हैं, उनका इन गांवों से कोई लेना-देना नहीं है।

पांचों आरोपी जेल भेजे
पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार किए गए सभी पांचों आरोपियों को सोमवार को कोर्ट में पेश किया। अदालत ने सभी को जेल भेज दिया है। पुलिस ने पूछताछ के लिए एक और डाकिया सहित कई लोगों को हिरासत में लिया है।
क्राइम ब्रांच भी जांच करेगी
मोदीनगर के भोजपुर में हुए फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच क्राइम ब्रांच करेगी। मामले में भोजपुर थाना पुलिस जांच के घेरे में है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के लिए पूरा मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा जा रहा। पुलिस आयुक्त जे. रविन्दर गौड़ ने बताया कि फर्जी पासपोर्ट मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। फर्जी पासपोर्ट का मामला काफी संवेदनशील होता है। जांच में कोताही न हो और जांच निष्पक्ष हो, इसके लिए इसे क्राइम ब्रांच को सौंपा जाएगा। वहीं, पुलिस की मिलीभगत की भी जांच होगी। संलिप्तता पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
सारथी पोर्टल पर दोनों आरोपी का डाटा नहीं मिला
गिरफ्तार आरोपियों से बरामद ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर नया खुलासा हुआ है। परिवहन विभाग के सारथी पोर्टल पर लाइसेंसों का कोई भी डाटा दर्ज नहीं है। इसकी पुष्टि एआरटीओ प्रशासन ने की। इससे साफ है कि लाइसेंस फर्जी बनवाए गए हैं। पुलिस की जांच में भी फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने में आरोपियों ने पहचान के तौर पर ड्राइविंग लाइसेंस का इस्तेमाल किया था।
लापरवाही बरतने वाला डाक मुंशी निलंबित
फर्जी पासपोर्ट मामले मे लापरवाही बरतने पर डाक मुंशी (सिपाही) को निलंबित कर दिया गया है। नाम सामने आने के बाद निलंबित सिपाही मोबाइल बंद कर फरार हो गया। पासपोर्ट के लिए सत्यापन करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। गांव त्योड़ी बिस्वा 7, सैदपुर और भोजपुर के पते पर फर्जी दस्तावेज लगाकर 22 पासपोर्ट जारी किए गए।
एसीपी मोदीनगर अमित सक्सेना ने कहा कि गिरफ्तार पांचों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। फरार आरोपियों की तलाश के लिए पांच टीम दबिश दे रहीं। फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाले मां-बेटे अफगानिस्तानी शरणार्थी हैं। बाकी 20 लोगों के बारे में भी पता किया जा रहा है।




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