दिल्ली में सब चलता है; 21 मौतों वाले होटल का मालिक अपनी गलतियों पर बोला
दिल्ली के जिस होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई उसके मालिक ने अब बेहद चौंकाने वाला पर उस मानसिकता को जाहिर करने वाला जवाब दिया है, जिसकी वजह से आए दिन हादसे होते हैं। आरोपी पुलिस पूछताछ में ‘सब चलता है’ वाला जवाब दिया है।

दिल्ली में सब चलता है...; यही वह मानसिकता है जिसने मालवीय नगर के होटल में 21 लोगों की जान ले ली है और इतने ही लोगों को अस्पताल के बिस्तर, आईसीयू और वेंटिलेटर तक पहुंचा दिया। 6 का लाइसेंस लेकर 30 से अधिक कमरों का होटल चलाने वाले मालिक लवकेश बजाज ने खुद पुलिस पूछताछ में कहा है कि उसने लापरवाहियों का इतना इंतजाम इसलिए किया था कि... यह सब सामान्य है और दिल्ली में सब चलता है।
न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के अनुसार आरोपी लवकेश बजाज ने दिल्ली पुलिस से पूछताछ के दौरान बताया कि उसके पास खुद उस होटल को संभालने या उसकी देखरेख करने का समय नहीं था। बजाज ने दावा किया कि उसने इस होटल की जिम्मेदारी किसी दूसरे व्यक्ति को सौंप दी थी, जो बिलिंग, हिसाब-किताब और पूरी व्यवस्था को संभाल रहा था।
सब चलता है… वाली सलाह पर किया था काम
बजाज ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को यह भी बताया कि इमारत में बदलाव, जिसमें कमरों का आकार बढ़ाना और कुछ फेरबदल करना शामिल था, किसी दूसरे व्यक्ति ने सुझाए थे। उस व्यक्ति ने उसे भरोसा दिलाया था कि इस तरह के इंतज़ाम 'आम बात' हैं और 'दिल्ली में सब कुछ चलता है।' पूछताछ के दौरान, बजाज ने यह भी माना कि उस जगह के पास फायर NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं था।
रिमांड पर ले सकती है पुलिस
आरोपी को गुरुवार को अदालत में पेश किए जाने की संभावना है। दिल्ली पुलिस उससे आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड की मांग कर सकती है, ताकि उसके दावों की सच्चाई जांची जा सके और इसमें शामिल अन्य लोगों व संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाया जा सके।
6 कमरों का लाइसेंस, बनाए थे 33
होटल मालिक के पास महज 6 कमरे के बीएंडबी (बेड एंड ब्रेकफास्ट) का लाइसेंस था, लेकिन उसने इसे 33 कमरों वाला विशाल होटल बना दिया था। होटल जितना बड़ा था, सुरक्षा के इंतजाम उतने ही कम। होटल में बड़ी संख्या में लोग कमरे बुक करते थे, इसके अलावा रेस्टोरेंट में खाना खाने भी आते थे। इसके बावजूद इसमें एंट्री और एग्जिट का एक ही रास्ता था। आग लगने के बाद यह रास्ता भी बंद हो गया। इसकी वजह से लोग बाहर नहीं निकल पाए।
इमारत की छत तक पहुंचने का रास्ता बंद था
निचली मंजिलों पर आग और धुआं फैलने पर लोगों ने ऊपर की ओर भागकर जान बचाने की कोशिश की। लेकिन सीढ़ियों में धुएं का घना गुबार भर जाने से छत तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया। आग और धुएं के कारण छत की ओर जाने वाला रास्ता प्रभावी रूप से बंद हो गया। इससे लोगों के पास बचाव का कोई सुरक्षित विकल्प नहीं बचा।
कमरों की सील खिड़कियों ने बढ़ाया खतरा
जांच में सामने आया कि अधिकांश कमरों की खिड़कियां स्थायी रूप से बंद या सील थीं। आग लगने पर धुआं और गर्मी बाहर नहीं निकल सके। जहरीला धुआं तेजी से पूरे भवन में फैल गया और लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त वेंटिलेशन होता तो नुकसान कुछ हद तक कम हो सकता था।




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