गुरुग्राम के 'अंसल HUB-83' प्रोजेक्ट धोखाधड़ी मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, कुर्क की 82 करोड़ रुपए की संपत्ति
कार्रवाई के बारे में एक बयान जारी करते हुए ED ने बताया कि, 'निवेशकों को समय पर कब्जा देने और वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं देने का वादा किया गया था, लेकिन लगभग 15 साल गुजरने बाद भी ना तो कोई ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी किया गया है, और ना ही अबतक कब्जा दिया गया है।'

गुरुग्राम के सेक्टर-83 में स्थित कमर्शियल प्रोजेक्ट 'अंसल हब-83' से जुड़े एक बड़े रियल एस्टेट घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत इस प्रोजेक्ट की 82 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को कुर्क (अटैच) कर लिया है। ED ने यह कार्रवाई अंसल हाउसिंग लिमिटेड (पूर्व में अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड) के प्रमोटरों और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामले में की है। इस प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले 1,000 से अधिक लोगों ने 'HUB-83 अलॉटी वेलफेयर एसोसिएशन' के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी।
इस कार्रवाई के बारे में गुरुवार को जानकारी देते हुए ED ने बताया कि यह प्रोजेक्ट लगभग 2.47 एकड़ (19 कनाल 15 मरला) जमीन पर फैला हुआ है और इसमें 147 व्यवसायिक दुकानें, 137 ऑफिस स्पेस और दो रेस्टोरेंट यूनिट हैं।
1000 से ज्यादा निवेशकों ने दर्ज कराई शिकायत
ED ने कहा कि उसकी जांच हरियाणा पुलिस द्वारा जून 2023 में अंसल हाउसिंग लिमिटेड (पूर्व में अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड) के प्रमोटर्स और सीनियर अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। इस बारे में HUB-83 अलॉटी वेलफेयर एसोसिएशन ने शिकायत दर्ज कराई थी और बताया था कि उन्होंने झूठे भरोसे और गुमराह करने वाली बातों में फंसकर प्रोजेक्ट में अपनी मेहनत की कमाई लगाई थी।
लाइसेंस खत्म होने के बाद भी लेते रहे पैसे
ED की जांच में पता चला कि प्रोजेक्ट लॉन्च होने के बाद वैध कानूनी मंजूरी मिलने से पहले ही कंपनी द्वारा निवेशकों को कमर्शियल यूनिट्स बेच दी गईं। यहां तक कि दिसंबर 2015 में प्रोजेक्ट का लाइसेंस खत्म होने के बाद भी, डेवलपर्स ने लाइसेंस रिन्यू नहीं कराया और सितंबर 2023 तक निवेशकों से पैसे इकट्ठा करना और यूनिट्स बेचना जारी रखा।
निवेशकों ने हरेरा से भी लगाई थी गुहार
जांच में यह भी सामने आया कि कई परेशान निवेशकों ने न्याय पाने के लिए हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) का दरवाजा भी खटखटाया था और पजेशन में देरी, प्रोजेक्ट पूरा न होने, गैर-कानूनी तरीके से पैसे इकट्ठा करने और डेवलपर द्वारा कानूनी दायित्वों के उल्लंघन के बारे में शिकायतें दर्ज कराई थीं।
15 साल बाद भी हालत जस के तस
कार्रवाई के बारे में एक बयान जारी करते हुए ED ने बताया कि, 'निवेशकों को समय पर कब्जा देने और वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं देने का वादा किया गया था, लेकिन लगभग 15 साल गुजरने बाद भी ना तो कोई ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी किया गया है, और ना ही अबतक कब्जा दिया गया है।'
लोगों से मिले पैसों को प्रोजेक्ट में नहीं लगाया
ED की जांच में यह भी पता चला कि निवेशकों से इकट्ठा किए गए फंड का इस्तेमाल कंपनी द्वारा प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए नहीं किया गया, बल्कि दूसरे कामों और निजी फायदे के लिए किया गया था। ईडी को मिली जानकारी के अनुसार साल 2011 से 2023 तक निवेशकों से 82 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम इकट्ठा की गई।
उधर केंद्रीय एजेंसी ने इस प्रोजेक्ट की जमीन और अबतक हुए निर्माण को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है, ताकि आरोपी इस सम्पत्ति को किसी को भी बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकें। एजेंसी ने बताया कि यह कदम भविष्य में PMLA के तहत संपत्ति की जब्ती सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।




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