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गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे के धंसने का खतरा! NHAI ने GMDA की पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर उठाए सवाल

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने गुरुग्राम सेक्टर-36ए के पास द्वारका एक्सप्रेसवे के धंसने की आशंका जताई है। इसका कारण जीएमडीए की तरफ से इस एक्सप्रेसवे के नीचे डाली जा रही मुख्य पाइपलाइन को बताया है।  

Sat, 4 April 2026 09:25 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, गुरुग्राम
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गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे के धंसने का खतरा! NHAI ने GMDA की पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर उठाए सवाल

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने गुरुग्राम सेक्टर-36ए के पास द्वारका एक्सप्रेसवे के धंसने की आशंका जताई है। इसका कारण गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) की तरफ से इस एक्सप्रेसवे के नीचे डाली जा रही मुख्य पाइपलाइन को बताया है। पाइपलाइन डालने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी मोहम्मद सैफी ने एनएचएआई अध्यक्ष संतोष यादव को को पत्र लिखकर सूचित किया है कि सेक्टर-36ए में एवीएल-36 सोसाइटी और गांव सिंही अंडरपास के समीप जीएमडीए की तरफ से पेयजल लाइन डाली जा रही है। इस लाइन को डालने के लिए अपनाई जा रही तकनीक सही नहीं है। इस वजह से सर्विस रोड पर कई जगह दरार आ गई हैं।

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ऐसे में एक्सप्रेसवे की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बन गई है। पत्र में कहा कि इस एक्सप्रेसवे पर तेज गति से वाहन दौड़ते हैं। यदि एक्सप्रेसवे धंसता है तो बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है। उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

इस वजह से चिंता जताई

इस मामले में जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता अभिनव वर्मा ने कहा कि एक्सप्रेसवे के नीचे से पाइपलाइन डालने का कार्य 99 प्रतिशत हो चुका है। यह कार्य अब अंतिम चरण में है। पाइपलाइन से एक्सप्रेसवे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। मौके पर एक्सप्रेसवे की स्थिति ठीक है। एक्सप्रेसवे को नुकसान पहुंचने की बात गलत है। एनएचएआई के एक अधिकारी ने बताया कि इस पाइपलाइन को ट्रेंचलैस पद्धति से बनाना चाहिए था, लेकिन जीएमडीए की तरफ से इस पाइपलाइन को धक्का तकनीक से डाला जा रहा है। इस वजह से एक्सप्रेसवे के नीचे से मिट्टी खिसकने की आशंका बनी रहती है। एक्सप्रेसवे के धसने से बड़ा हादसा घटित हो सकता है।

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प्राधिकरण ने रुकवाया था निर्माण कार्य

इस पाइपलाइन के डलने की वजह से दो बार द्वारका एक्सप्रेसवे धंस चुका है। एनएचएआई ने अक्टूबर में द्वारका एक्सप्रेसवे धंसने के बाद निर्माण कार्य रुकवा दिया था। आरोप लगाया था कि इस पाइपलाइन को डालने से पहले मंजूरी नहीं ली गई है। जीएमडीए के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्यामल मिश्रा ने एनएचएआई अध्यक्ष से बातचीत की थी। इसके बाद एनएचएआई से जीएमडीए को पाइप लाइन डालने की मंजूरी मिल गई थी। जीएमडीए की तरफ से सेक्टर-72ए में 100 करोड़ से बूस्टिंग स्टेशन तैयार किया है। करीब 350 करोड़ की लागत से जमीन का अधिग्रहण किया है।

इसलिए डाली जा रही पाइपलाइन

जीएमडीए ने सेक्टर-58 से लेकर सेक्टर-80 तक पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए चंदू बुढेड़ा से लेकर सेक्टर-72 बूस्टिंग स्टेशन तक पाइपलाइन डालनी थी। द्वारका एक्सप्रेसवे पर पाइपलाइन डली हुई थी, लेकिन एनएचएआई ने जब इस एक्सप्रेसवे को अपने अधीन लिया तो इस पाइपलाइन को स्थानांतरित करने की योजना बनाई। करीब 350 मीटर क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण नहीं होने से पाइपलाइन नहीं डाली जा सकी। 23 सेक्टरों में पानी की मांग उठने के बाद जीएमडीए ने एक्सप्रेसवे के नीचे से पाइपलाइन को घुमाकर निकालने की योजना बनाई।

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