दिल्ली के 75 सीएम श्री स्कूल बनेंगे हाई-टेक, AI और रोबोटिक्स से होंगे लैस; इनके लिए 50% सीटें आरक्षित
इन स्कूलों के कैंपस में आधुनिक टूल्स वाले स्मार्ट क्लासरूम, एआई-लैब, रोबोटिक्स लैब और बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम होगा। इन स्कूलों को ग्रीन कैंपस के रूप में तैयार किया जाएगा जहां सोल पैनल लगेंगे। वहीं कचरे के लिए भी खास व्यवस्था की जाएगी।

दिल्ली सरकार 75 सीएम श्री स्कूल को हाई-टेक बनाने जा रही है। इन स्कूलों में ग्लोबल एजुकेशन स्टैंडर्ड को ध्यान में रखते हुए बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तो पढ़ाया ही जाएगा साथ ही क्लासरूम में स्मार्ट बोर्ड, प्रोजेक्टर और दूसरी आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी। इन स्कूलों में बच्चों को किताबी ज्ञान के बजाय स्किल्स सिखाने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा।
एक अधिकारी ने बताया कि इन स्कूलों को नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 को ध्यान में रखते हुए आधुनिक बनाया जा रहा है। बच्चों को उभरती ग्लोबल डिमांड को ध्यान में रखते हुए स्किल आधारित पढ़ाई करवाई जाएगी। बच्चों को एआई की मदद से पढ़ाने के अलावा डिजिटल और प्रैक्टिकल तरीकों पर भी जोर दिया जाएगा। बच्चों पर से परीक्षा का तनाव कम करने के लिए एक आसान और लचीला मूल्यांकन सिस्टम शुरू होगा।
अधिकारी ने बताया कि इन स्कूलों के कैंपस में आधुनिक टूल्स वाले स्मार्ट क्लासरूम, एआई-लैब, रोबोटिक्स लैब और बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम होगा। इन स्कूलों को ग्रीन कैंपस के रूप में तैयार किया जाएगा जहां सोल पैनल लगेंगे। वहीं कचरे के लिए भी खास व्यवस्था की जाएगी।
सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए 50% सीटें आरक्षित
ये स्कूल नर्सरी से या फिर क्लास 6 से शुरू होंगे। क्लास 6 में एडमिशन के लिए प्रतिभाशाली स्टूडेंट्स को चुनने के लिए एप्टीट्यूड टेस्ट लिया जाएगा। आधी सीटें सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों जैसे एमसीडी, एनडीएमसी, केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय के बच्चों के लिए आरक्षित होंगी। वहीं एससी, एसटी, ओबीसी (नॉन-क्रीमी लेयर) और दिव्यांग छात्रों को पात्रता में 5 फीसदी की छूट दी जाएगी।
एमसीडी कर चुकी ये ऐलान
एमसीडी ने बीते महीने ऐलान किया है की कि वह केंद्र सरकार के 'पीएम श्री' स्कूलों और दिल्ली सरकार के 'सीएम श्री' स्कूलों की तर्ज पर 'एमसीडी श्री' स्कूल खोलने जा रही है। इन स्कूलों में मेधावी स्टूडेंस को ही एडमिशन मिलेगा। इन स्कूलों का फोकस छात्रों को हायर एजुकेशन के लिए तैयार करना होगा। इन स्कूलों में छात्रों को कोडिंग, क्रिटिकल थिंकिंग, रोबोटिक्स और प्रॉब्लम-सॉल्विंग की ट्रेनिंग भी मिलेगी।
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