1.52 करोड़ मुआवजा देने का आदेश, तेज रफ्तार कार की टक्कर के बाद से कोमा में है पीड़ित
दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 2022 में एक सड़क दुर्घटना में 100 प्रतिशत स्थायी विकलांगता से पीड़ित व्यक्ति को 1.52 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। न्यायाधिकरण ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपनी दैनिक जरूरतों और चिकित्सा देखभाल के लिए पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर है।

दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 2022 में एक सड़क दुर्घटना में 100 प्रतिशत स्थायी विकलांगता से पीड़ित व्यक्ति को 1.52 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। न्यायाधिकरण ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपनी दैनिक जरूरतों और चिकित्सा देखभाल के लिए पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर है।
लापरवाही और तेज गति के कारण दुर्घटना
न्यायाधिकरण के अध्यक्ष सुदीप राज सैनी ने भरत घई नामक पीड़ित द्वारा दायर दावे की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए। घई को 11 फरवरी 2022 को एक तेज रफ्तार कार की टक्कर में सिर में गंभीर चोटें आई थीं। 16 मार्च के एक आदेश में न्यायाधिकरण ने कहा कि संभावनाओं की प्रबलता के आधार पर यह सिद्ध हो चुका है कि यह दुर्घटना कार चालक द्वारा संचालित और स्वामित्व वाले मोटर वाहन की लापरवाही और तेज गति से गाड़ी चलाने के कारण हुई।
सिर में गंभीर चोट लगी
न्यायाधिकरण ने पाया कि दुर्घटना के कारण याचिकाकर्ता को सिर में गंभीर चोट लगी, जिसके परिणामस्वरूप वे घटना के बाद से बिस्तर पर पड़े हैं और कोमा में हैं। न्यायाधिकरण ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी दैनिक जरूरतों और चिकित्सा देखभाल के लिए पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हैं। इसलिए यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता को जीवन भर कम से कम एक पूर्णकालिक परिचारक की जरूरत होगी।
बचाव पक्ष का तर्क खारिज
ड्राइवर के कानूनी प्रतिनिधियों के इस बचाव को खारिज करते हुए कि वाहन दुर्घटना में शामिल नहीं था, न्यायाधिकरण ने एफआईआर, आरोप पत्र, चिकित्सा रिकॉर्ड और चश्मदीद गवाहों की गवाही पर भरोसा करते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि दुर्घटना लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुई।
विभिन्न मदों के तहत मुआवजे का आकलन
न्यायाधिकरण ने कहा कि याचिकाकर्ता को पूर्णतः शारीरिक अक्षमता हो गई है और वह अपनी सभी जरूरतों के लिए पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर है। न्यायाधिकरण ने भविष्य की आय की हानि, चिकित्सा खर्च और दीर्घकालिक देखभाल की जरूरतों सहित विभिन्न मदों के तहत मुआवजे का आकलन किया।
मुआवजा राशि का भुगतान करने का निर्देश
न्यायाधिकरण ने भविष्य की आय की हानि के लिए 52 लाख रुपए से अधिक और अस्पताल में भर्ती होने के खर्च के लिए 54 लाख रुपए से अधिक का मुआवजा दिया। इसके अलावा अन्य क्षतिपूर्ति भी शामिल हैं। न्यायाधिकरण ने यह भी पाया कि पीड़ित को आजीवन चिकित्सा देखभाल और सहायता की जरूरत होगी, जिसमें एक पूर्णकालिक परिचारक भी शामिल है। न्यायाधिकरण ने यह भी पाया कि दुर्घटना के समय वाहन का बीमा था और बीमा कंपनी को पीड़ित को मुआवजा राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया।




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