दिल्ली में युवक को मिला 84 लाख का इंसाफ, कार ड्राइवर की गलती से उजड़ गई थी जिंदगी
यह एक्सीडेंट 20 अगस्त 2024 को हुआ था। पीड़ित ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार उसे इंसाफ मिला। अदालत ने बीमा कंपनी को 84.50 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है।

दिल्ली की एक मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए 21 वर्षीय युवक को 84.50 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है। हादसे में युवक को 90 प्रतिशत स्थायी विकलांगता झेलनी पड़ी थी। यह फैसला प्रेसाइडिंग ऑफिसर पूजा अग्रवाल ने सुनाया।
कैसे हुआ हादसा
पीटीआई के मुताबिक, यह एक्सीडेंट 20 अगस्त 2024 को हुआ था। पीड़ित युवक रोशन कुमार साहू अपनी मोटरसाइकिल से बुराड़ी स्थित एक बैंक शाखा जा रहा था। इसी दौरान सड़क किनारे खड़ी एक कार के ड्राइवर वहाबुद्दीन ने बिना पीछे देखे और बिना किसी संकेत के अचानक कार का दरवाजा खोल दिया। साहू की मोटरसाइकिल सीधे कार के दरवाजे से टकरा गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
ट्रिब्यूनल ने क्या कहा
ट्रिब्यूनल ने अपने 16 जनवरी 2026 के आदेश में कहा कि कार ड्राइवर द्वारा बिना चेतावनी या संकेत दिए दरवाजा खोलना लापरवाही और असावधानी का साफ उदाहरण है। ट्रिब्यूनल ने माना कि हादसा सीधे तौर पर चालक की इसी लापरवाही का नतीजा था।
90% स्थायी विकलांगता
मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार, रोशन कुमार साहू को हादसे में 90 प्रतिशत स्थायी विकलांगता हुई है। दुर्घटना के समय उसकी उम्र 21 वर्ष थी। ट्रिब्यूनल ने उसकी आय का आकलन दिल्ली में ग्रेजुएट के लिए तय न्यूनतम मजदूरी के आधार पर किया।
मुआवजे का पूरा ब्योरा
ट्रिब्यूनल ने अलग-अलग मदों में कुल 84.65 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा मंजूर किया। इसमें सबसे बड़ी राशि 64.58 लाख रुपये भविष्य की कमाई के नुकसान (Loss of Future Earnings) के तौर पर दी गई है। इसके अलावा इलाज, दर्द, मानसिक पीड़ा और जीवन की गुणवत्ता पर पड़े असर को भी ध्यान में रखा गया।
बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश
हादसे के समय कार का बीमा रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के पास था। बीमा कंपनी ने पहले 1.24 लाख रुपये का कानूनी ऑफर दिया था, जिसे पीड़ित ने स्वीकार नहीं किया। ट्रिब्यूनल ने माना कि बीमा कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है, इसलिए उसे पूरी मुआवजा राशि जमा करने का निर्देश दिया गया। ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि इस मामले में कार ड्राइवर की लापरवाही साबित हो चुकी है और पीड़ित को न्याय दिलाना जरूरी है।




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