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दिल्ली में छाया Heat Stroke का साया! क्यों मानी जाती मेडिकल इमरजेंसी? बर्फ में डुबोकर बचाते हैं जान

Heat Stroke Cases Delhi: जी हां, हीट स्ट्रोक इतनी खतरनाक स्थिति है कि आपका शरीर जवाब दे सकता है। राजधानी दिल्ली में अब तक दो मामलों की पुष्टि हो चुकी है। हीट स्ट्रोक क्या है, इसके लक्षण क्या हैं, होने पर क्या करें, क्या न करें… ऐसे तमाम सवालों के जबाव जानेंगे इस रिपोर्ट में।

Thu, 21 May 2026 04:40 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली में छाया Heat Stroke का साया! क्यों मानी जाती मेडिकल इमरजेंसी? बर्फ में डुबोकर बचाते हैं जान

Heat Stroke Cases Delhi: पश्चिम बंगाल से दिल्ली आया 24 साल का छात्र “हीट स्ट्रोक” की चपेट में आकर बेहोश हो गया। शरीर का तापमान 105 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच गया। RML अस्पताल लाया गया, जहां बर्फ के टब में 15-20 मिनट लिटाया गया। तब जाकर तापमान कम हो सका। फिलहाल ICU में वेंटिलेटर पर है। जी हां, हीट स्ट्रोक इतनी खतरनाक स्थिति है कि आपका शरीर जवाब दे सकता है। राजधानी दिल्ली में अब तक दो मामलों की पुष्टि हो चुकी है। हीट स्ट्रोक क्या है, इसके लक्षण क्या हैं, होने पर क्या करें, क्या न करें… ऐसे तमाम सवालों के जबाव जानेंगे इस रिपोर्ट में। बने रहिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ।

  • हीट स्ट्रोक आखिर होता क्या है?

हीट स्ट्रोक गर्मी से जुड़ी सबसे खतरनाक मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है। यह तब होता है, जब शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। आमतौर पर शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा रखता है, लेकिन भीषण गर्मी, लू और उमस में कई बार यह सिस्टम फेल हो जाता है।

  • क्यों मानी जाती है मेडिकल इमरजेंसी?

डॉक्टरों के मुताबिक, इस स्थिति में शरीर का तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाता है। ऐसे में दिमाग, किडनी, दिल और दूसरे अंग प्रभावित होने लगते हैं। मरीज को चक्कर, उलझन, बेहोशी, तेज सांस, उल्टी और यहां तक कि दौरे भी पड़ सकते हैं। कुल मिलाकर शरीर का सिस्टम फेल होने लगता है। इसलिए इस स्थिति को मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।

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  • दिल्ली में छात्र हीट स्ट्रोक की चपेट में कैसे आया

अच्छा, पहले ये जानते हैं कि दिल्ली के RML अस्पताल में भर्ती हुए छात्र का क्या हुआ, डॉक्टरों ने क्या बताया? अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार वह छात्र ट्रेन के जनरल कोच में बैठकर सफर कर रहा था। कोच में अधिक भीड़ थी। इस वजह से गर्मी के साथ-साथ उसके शरीर में पानी की भी कमी हो गई थी। इस वजह से वह हीट स्ट्रोक की चपेट में आया।

  • शुरूआत में लगा था कि ब्रेन स्ट्रोक हुआ, लेकिन फिर…

दिल्ली सरकार के एक अस्पताल से उसे रात करीब 1:45 बजे आरएमएल अस्पताल में ट्रांसफर किया गया। शुरुआत में ब्रेन स्ट्रोक का मामला महसूस हुआ लेकिन सीटी स्कैन जांच में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई। उसके शरीर का तापमान 105 डिग्री फारेनहाइट था। इसके अलावा उसे कोई अन्य परेशानी नहीं थी।

heat stroke
  • हीट स्ट्रोक के दूसरे मामले को भी जानिए

लगे हाथ, आपको दूसरे केस के बारे में भी बता देते हैं। RML अस्पताल में ही हीट स्ट्रोक का दूसरा मामला सामने आया। पुलिस पीसीआर ने करीब 50 वर्षीय मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया। जिसे 104 डिग्री फारेनहाइट बुखार था। उसे बेहोशी की स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया। बर्फ के टब में 15 मिनट तक मरीज को लिटाकर शरीर को ठंडा किया गया। फिलहाल, मरीज की हालत गंभीर है और वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर भर्ती है।

  • डॉक्टर बर्फ के टब में क्यों रखते हैं

अच्छा, अब हम हीट स्ट्रोक पर वापस आते हैं। आप शायद सोच रहे होंगे कि आखिर डॉक्टरों ने छात्र को बर्फ के टब में क्यों रखा, तो इसका कारण विस्तार से समझिए। दरअसल, ऐसी स्थिति में डॉक्टर सबसे पहले शरीर का तापमान तेजी से कम करने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से कई गंभीर मरीजों को बर्फ या ठंडे पानी से भरे टब में रखा जाता है। इसे रेपिड कूलिंग टेक्नीक कहा जाता है। इससे शरीर का तापमान तेजी से नीचे लाने में मदद मिलती है, ताकि अंगों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

दिल्ली में गर्मी
  • हीट स्ट्रोक और सामान्य लू में क्या फर्क है?

अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसी स्थिति तो लू लगने के समय भी हो जाती है। तो इसका जवाब है, जी नहीं। लू लगना और हीट स्ट्रोक का शिकार होना, दोनों अलग-अलग बाते हैं। जानिए कैसे… लू लगना (Heat Exhaustion) गर्मी से जुड़ी शुरुआती और कम गंभीर स्थिति हो सकती है, जबकि हीट स्ट्रोक मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।

  • लू लगने को हीट स्ट्रोक समझने की भूल मत करना

आम तौर पर लू लगने के बाद व्यक्ति को कमजोरी, ज्यादा पसीना आना, चक्कर, सिरदर्द, उल्टी या थकान महसूस हो सकती है। कई बार पानी पीने, आराम करने और ठंडी जगह पर बैठने से राहत मिल जाती है। लेकिन हीट स्ट्रोक में शरीर का तापमान तेजी से खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। मरीज बेहोश तक हो सकता है। पश्चिम बंगाल से दिल्ली आए, छात्र के केस में भी ऐसा ही हुआ है। कई बार मरीज के सिस्टम तक फेल हो जाते हैं, जैसा कि ऊपर बताया गया है।

  • कब भागें अस्पताल; क्या करें, क्या न करें

अगर तेज गर्मी में किसी व्यक्ति को बेहोशी, उलझन, ठीक से बात न कर पाना, तेज बुखार जैसा शरीर गर्म होना, सांस तेज चलना, बार-बार उल्टी या दौरे जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक, हीट स्ट्रोक में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसी स्थिति में मरीज को तुरंत धूप से हटाकर ठंडी जगह पर लिटाएं, कपड़े ढीले करें, शरीर पर ठंडा पानी डालें या बर्फ की पट्टियां लगाएं।

अगर व्यक्ति होश में है, तो उसे पानी या ORS दिया जा सकता है। वहीं बेहोश व्यक्ति को जबरदस्ती पानी पिलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, शरीर में पानी की कमी न होने दें और लंबे समय तक धूप में काम करने पर बीच-बीच में आराम जरूर करें।

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