ACP और SHO के जाली साइन कर कोर्ट में लगाई थी चार्जशीट, दिल्ली पुलिस की महिला SI कविता माथुर दोषी करार
दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस की पूर्व सब-इंस्पेक्टर कविता माथुर को सीनियर अफसरों के फर्जी हस्ताक्षर करके अदालत में चार्जशीट दायर करने और एक वरिष्ठ अधिकारी को धमकी भरा मैसेज भेजने का दोषी पाया है।

दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस की पूर्व सब-इंस्पेक्टर को सीनियर अफसरों के फर्जी हस्ताक्षर करके अदालत में चार्जशीट दायर करने और एक वरिष्ठ अधिकारी को धमकी भरा मैसेज भेजने का दोषी पाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट सौरभ गोयल ने कहा कि पुलिस अधिकारी की यह कार्रवाई न्यायिक रिकॉर्ड की शुचिता पर हमला है।
अदालत ने 2 अप्रैल के आदेश में कहा कि अभियोजन ने यह साबित कर दिया है कि आरोपी सब-इंस्पेक्टर कविता माथुर ने सार्वजनिक दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया और इन दस्तावेजों का उपयोग आधिकारिक प्रक्रियाओं को भ्रमित और प्रभावित करने के लिए किया।
एसीपी और एसएचओ के फर्जी साइन किए
अभियोजन पक्ष के अनुसार, कविता माथुर 2015 में पालम गांव थाने में सब-इंस्पेक्टर थीं। इस दौरान उन्होंने कई अंतिम रिपोर्ट और चार्जशीट में फर्जी तरीके से तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) एम. हर्षवर्धन और तत्कालीन थाना प्रमुख (एसएचओ) नियती मित्तल कश्यप के साइन तैयार किए। अदालत इस बात पर गौर किया कि अभियुक्त ने यह जानते हुए कि सीनियर अफसरों के साइन फर्जी है, इन दस्तावेजों को अदालत में वास्तविक दस्तावेज के रूप में दाखिल किया।
जज ने कहा कि इस मामले में प्रत्यक्ष साक्ष्यों, स्वतंत्र गवाहों की गवाही, सीएफएसल रिपोर्ट, अदालती रिकॉर्ड और अभियुक्त के व्यवहार के आधार पर वह दोषी सिद्ध होती है।
एफएसएल रिपोर्ट से भी पुष्टि
सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब (सीएफएसएल) की रिपोर्ट ने भी पुष्टि की कि दस्तावेजों पर मौजूद साइन संबंधित अधिकारियों के वास्तविक साइन से मेल नहीं खाते। अदालत ने यह भी कहा कि अभियुक्त के पास केस फाइलों की देखरेख होने के कारण दस्तावेजों में हेरफेर करने का अवसर था।
एसीपी को भेजा सुसाइड की धमकी वाला मैसेज
अभियोजन ने यह आरोप भी लगाया कि 23 जुलाई 2015 को माथुर ने एसीपी हर्षवर्धन को मोबाइल पर मैसेज भेजा कि एफआईआर ने उनका करियर बर्बाद कर दिया है और वह सुसाइड कर लेंगी। अदालत ने माना कि यह संदेश अधिकारी को डराने और शिकायत को आगे न बढ़ाने के उद्देश्य से भेजा गया था।
कोर्ट ने कृत्य को न्यायिक रिकॉर्ड की शुचिता पर हमला बताया
जज ने कहा कि अभियुक्त ने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते समय अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर वाले दस्तावेज अदालत में दाखिल किए, लिहाजा यह निजी धोखाधड़ी से बढ़कर न्यायिक रिकॉर्ड की शुचिता पर हमला है।
इन धाराओं में आरोप तय किए गए
कविता माथुर को सार्वजनिक दस्तावेजों में जालसाजी करने, फर्जी दस्तावेज का वास्तविक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल करने, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के लिए दोषी ठहराया गया। उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 417, 465, 466, 468 और 471 के साथ 506 भाग-1 के तहत आरोप तय किए गए। अदालत ने कहा कि सजा पर बहस के लिए अगली सुनवाई बाद में की जाएगी।




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