Delhi Police bust Mewat-based cyber fraud racket, accused impersonated Indian Air Force officials फर्जी पेपर्स से व्यापारियों को ठगने वाला गिरोह धराया, यूं बनाते थे शिकार; दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी, Ncr Hindi News - Hindustan
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फर्जी पेपर्स से व्यापारियों को ठगने वाला गिरोह धराया, यूं बनाते थे शिकार; दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी

गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि नूंह, मेवात के दूरदराज के इलाकों में बड़ी संख्या में युवा साइबर अपराधों में शामिल हैं, जिनमें वे सेना अधिकारी बनकर लोगों को ठगते हैं। इस दौरान अपनी पहचान छिपाने व पुलिस से बचने के लिए वे अन्य लोगों के नाम पर खरीदे गए सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं।

Fri, 8 May 2026 03:22 PMSourabh Jain एएनआई, नई दिल्ली
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फर्जी पेपर्स से व्यापारियों को ठगने वाला गिरोह धराया, यूं बनाते थे शिकार; दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी

दिल्ली पुलिस ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो कि खुद को सेना और भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी के रूप में बताकर लोगों खासकर कारोबारियों को शिकार बनाते थे। 5 लाख रुपए की ठगी के ऐसे ही एक मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चार साइबर ठगों को धर दबोचा।

आरोपियों ने खुद को भारतीय वायु सेना का अधिकारी बताते हुए पीड़ित से एल्युमिनस लैटेराइट (इंडस्ट्रियल ग्रेड 40-45%) की खरीदी और सप्लाई करने की बात की थी। इसके बाद वायु सेना द्वारा जारी किया गया एक फर्जी परचेज ऑर्डर (क्रय आदेश) भी भेजकर उसका भरोसा भी जीत लिया था। हालांकि आरोपियों के झांसे में आकर जब पीड़ित ने सामान भेज दिया, तो जालसाजों ने उससे कहा कि आपका नाम स्वीकृत वेंडर की लिस्ट में शामिल नहीं है, ऐसे में उन्होंने शिकायतकर्ता से वेंडर रजिस्ट्रेशन के बहाने पैसे जमा कराने को कहा। इसके बाद पीड़ित को कुछ गड़बड़ी होने का शक हो गया और वह पुलिस के पास पहुंच गया।

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पीड़ित ने बताया उसे हुए कितने रुपए का नुकसान

इस बारे में इंटर-स्टेट सेल (ISC) क्राइम ब्रांच के पास दर्ज कराई शिकायत में पीड़ित ने बताया इस धोखाधड़ी के कारण उसे 5,06,415 रुपए का नुकसान हुआ। जिसके बाद क्राइम ब्रांच पुलिस ने इस मामले में जालसाजी और फर्जी पहचान बताकर धोखाधड़ी करने से जुड़ी धाराओं में एक FIR दर्ज कर ली।

सिम यूपी से हुए जारी, लेकिन हरियाणा के नूंह में हो रहे थे इस्तेमाल

जब पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो तकनीकी विश्लेषण के दौरान यह पता चला कि इस अपराध को अंजाम देने में इस्तेमाल किए गए SIM कार्ड उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से जारी किए गए थे, लेकिन उन्हें हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले में कुछ तय जगहों से ऑपरेट किया जा रहा था। इससे इस बात की पुष्टि हो गई कि इस गिरोह को मेवात इलाके में बैठे साइबर जालसाज चला रहे थे।

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चार में से दो आरोपियों की गिरफ्तारी यूपी से हुई

उधर मामले की गंभीरता और इसके अंतर-राज्यीय असर को देखते हुए पुलिस ने जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन कर दिया। जिसने उसे मिली सटीक खुफिया जानकारी और तकनीकी इनपुट के आधार पर कार्रवाई करते हुए धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल सिम मालिकों का पता लगा लिया। उनकी पहचान मनीष और कौशल के रूप में हुई, जो कि उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर और अलीगढ़ के रहने वाले हैं। इसके बाद पुलिस ने इन दोनों को गिरफ्तार करते हुए इस मामले में सह-आरोपी बुरहान उर्फ ​​आमिर और रिजवान अहमद को भी गिरफ्तार कर लिया। ये दोनों आरोपी हरियाणा के नूंह मेवात के रहने वाले निकले।

1500 की दर से आरोपियों को भेजे गए 30 सिम कार्ड

आरोपियों ने आगे खुलासा किया कि उन्होंने 1,500 रुपए प्रति सिम कार्ड की दर से अपने साथियों को लगभग 30 सिम कार्ड और 6,000 रुपए प्रति खाते की दर से छह बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। पुलिस ने इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान मनीष, कौशल, आमिर और रिजवान अहमद के रूप में हुई है। बाकी बचे आरोपियों को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी और तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं।

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सामान पहुंचाने के बाद मांगते थे अलग-अलग राशि

गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान खुलासा करते हुए बताया कि वे खुद को भारतीय वायु सेना का अधिकारी बताकर लोगों को ठगने वाला एक साइबर धोखाधड़ी रैकेट चलाते हैं। इस दौरान जब व्यापारी सामान तय जगह पर पहुंचा देते थे तो उनसे 'अकाउंट मैपिंग', 'वेंडर रजिस्ट्रेशन' या अन्य औपचारिकताओं के बहाने पैसे जमा करने के लिए कहा जाता है। जिन मामलों में पीड़ितों ने पैसे जमा कर दिए, वहां उनसे अलग-अलग मनगढ़ंत बहाने बनाकर और भी पैसों की मांग की जाती थी, जिससे धोखाधड़ी का यह सिलसिला जारी रहता था और पीड़ितों को लगातार ठगा जाता था।

आरोपी बोले- नूंह है साइबर अपराधियों का गढ़

गिरफ्तार आरोपियों बुरहान उर्फ ​​आमिर और रिजवान ने आगे बताया कि नूंह, मेवात के दूरदराज के इलाकों में बड़ी संख्या में युवा साइबर अपराध की गतिविधियों में शामिल हैं, जिनमें वे सेना और भारतीय वायु सेना के अधिकारी बनकर लोगों को ठगते हैं। इस तरह की धोखाधड़ी को अंजाम देने और इस दौरान अपनी पहचान छिपाने व पुलिस से बचने के लिए वे अलग-अलग लोगों के नाम पर खरीदे गए सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं।

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