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दिल्ली के रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ऐक्टिव हुई MCD

दिल्ली के रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एमसीडी ऐक्टिव हो गई है। दिल्ली नगर निगम पूरे शहर में एक सर्वे शुरू किया है। इस सर्वे का मकसद उन रिहायशी जगहों की पहचान करना है, जिनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। चाहे वह कमर्शियल मकसद से हो या गैर-रिहायशी मकसद से।

Sun, 26 April 2026 01:16 PMSubodh Kumar Mishra हिन्दुस्तान टाइम्स, नई दिल्ली
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दिल्ली के रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ऐक्टिव हुई MCD

देश की राजधानी दिल्ली के रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एमसीडी ऐक्टिव हो गई है। दिल्ली नगर निगम पूरे शहर में एक सर्वे शुरू किया है। इस सर्वे का मकसद उन रिहायशी जगहों की पहचान करना है, जिनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। चाहे वह कमर्शियल मकसद से हो या गैर-रिहायशी मकसद से।

इस महीने की शुरुआत में जारी एक आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली समेत देश के सभी राज्यों की राजधानी शहरों के नगर निगमों को इस मामले में एक पक्ष बनाया और उन्हें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इस संबंध में विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया। कोर्ट के इस निर्देश पर कार्रवाई करते हुए दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर संजीव खीरवार ने सभी जोनल डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिया कि वे उन इलाकों में एक समय-सीमा के भीतर यह काम पूरा करें, जिन्हें विशेष रूप से रिहायशी इस्तेमाल के लिए तय किया गया है।

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रिहायशी इलाकों की सभी श्रेणियां शामिल

अधिकारियों ने बताया कि इस सर्वे में रिहायशी इलाकों की सभी श्रेणियां शामिल होंगी। इनमें अनाधिकृत और नियमित कॉलोनियां, ग्रुप-हाउसिंग सोसाइटी और प्लॉट वाली बस्तियां शामिल हैं। पूरी तरह से कवरेज सुनिश्चित करने के लिए यह सर्वे दिल्ली नगर निगम सीमाओं के अंदर और आसपास के इलाकों तक की जाएगी।

फील्ड इंस्पेक्शन अनिवार्य

अधिकारी ने कहा कि फील्ड इंस्पेक्शन अनिवार्य कर दिए गए हैं। अधिकारियों को डेटा वेरिफाई करना होगा और जोन-वार उल्लंघनों की लिस्ट तैयार करनी होगी। नगर निकाय ने जोर देकर कहा है कि जांच के नतीजों के साथ उचित दस्तावेज भी होने चाहिए, क्योंकि इकट्ठा किया गया डेटा ही सुप्रीम कोर्ट में जमा किए जाने वाले हलफनामे का आधार बनेगा। वरिष्ठ अधिकारियों को उन मामलों में जवाबदेही तय करने का काम भी सौंपा गया है, जहां कोई चूक या विसंगति पाई जाती है।

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सात दिनों के भीतर देनी होगी रिपोर्ट

एमसीडी के निर्देशों के अनुसार, जोनल रिपोर्ट सात दिनों के भीतर अतिरिक्त आयुक्त (इंजीनियरिंग) को जमा करनी होंगी, ताकि उन्हें एक साथ संकलित किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि इस हलफनामे को एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया जाएगा।

बीजेपी नेता ने समय-सीमा कोअपर्याप्त बताया

इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि पूरे शहर में होने वाली इस कवायद के लिए तय समय-सीमा अपर्याप्त हो सकती है। उन्होंने मिश्रित-उपयोग वाले क्षेत्रों के फैक्ट आधारित मूल्यांकन की जरूरत पर जोर दिया।

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