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दिल्ली-NCR की सड़कों से हटेंगी पेट्रोल-डीजल गाड़ियां? जानिए कब हो जाएंगी कबाड़

दिल्ली-NCR में प्रदूषण कम करने के लिए एक सख्त रोडमैप तैयार किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, 2030 के बाद केवल इलेक्ट्रिक कारों का पंजीकरण होगा और 2040 तक BS-VI कारों को भी सड़कों से पूरी तरह हटा दिया जाएगा।

Thu, 5 Feb 2026 12:55 PMAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली-NCR की सड़कों से हटेंगी पेट्रोल-डीजल गाड़ियां? जानिए कब हो जाएंगी कबाड़

अगर आप दिल्ली-NCR में रहते हैं और पेट्रोल या डीजल गाड़ी के मालिक हैं, तो यह खबर आपके लिए है। प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए अब एक ऐसा ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है, जो सड़कों से पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों को हमेशा के लिए गायब कर देगा। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) द्वारा गठित एक एक्सपर्ट पैनल ने दिल्ली-एनसीआर के लिए एक सख्त रोडमैप का प्रस्ताव रखा है, जिसमें गाड़ियों को हटाने की तारीखें सुझाई गई हैं।

कब बंद होंगी BS-IV और BS-VI गाड़ियां?

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अशोक झुनझुनवाला की अध्यक्षता वाले पैनल ने ड्राफ्ट में साफ कर दिया है कि पुराने वाहनों के लिए अब कोई जगह नहीं है। ड्राफ्ट में कहा गया है कि BS-I, BS-II और BS-III वाहनों को सड़कों से तुरंत हटा दिया जाए। वहीं BS-IV वाहनों को अगले पांच सालों के भीतर चरणबद्ध तरीके से बाहर कर दिया जाएगा। पैनल ने BS-VI दोपहिया वाहनों को 2035 तक और BS-VI कारों को 2040 तक हटाने का सुझाव दिया है।

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2030 के बाद सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों का राज!

प्रस्ताव सबसे बड़ा झटका उन लोगों के लिए है जो नई कार खरीदने की सोच रहे हैं। ड्राफ्ट के मुताबिक, अप्रैल 2030 के बाद दिल्ली-NCR में सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों का ही रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। यानी 2030 के बाद आप चाहकर भी पेट्रोल-डीजल कार नहीं खरीद पाएंगे। वहीं, कमर्शियल इस्तेमाल होने वाले नए दोपहिया वाहन और टैक्सियों को अप्रैल 2027 से ही इलेक्ट्रिक (ZTE) होना अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है।

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इतनी सख्ती क्यों?

पैनल ने इस सख्त फैसले के पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है। रिपोर्ट में एक रोंगटे खड़े करने वाला तथ्य सामने आया है, जब AQI 250 के पार होता है, तो एक नवजात शिशु दिन भर में 10 से 15 सिगरेट पीने जितना धुआं सांस के जरिए अंदर लेता है। नेब्युलाइजर और इनहेलर की बढ़ती बिक्री ने भी खतरे की घंटी बजा दी है।

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घर पर चार्जिंग का मिलेगा 'कानूनी अधिकार'

लोगों को इलेक्ट्रिक गाड़ियां अपनाने में दिक्कत न हो, इसके लिए पैनल ने 'राइट टू चार्ज' का कानूनी ढांचा बनाने का सुझाव दिया है, ताकि घरों और दफ्तरों में चार्जिंग की सुविधा सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, PUC को सख्त करने के लिए अब सड़कों पर चलते वाहनों का रिमोट सेंसिंग डिवाइस से टेस्ट करने का भी प्लान है।

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