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दिल्ली-NCR में 500 से ऊपर AQI रीडिंग छिपाई जा रही? CAQM को भेजी गई 26 बड़ी सिफारिशें

दिल्ली-एनसीआर के नागरिकों और एनजीओ ने CAQM को सुधारों की सूची सौंपी है, जिसमें AQI मीटर की 500 वाली सीमा को हटाने, प्रदूषण के दिनों में मेट्रो-बस मुफ्त करने और प्रदूषण को साल भर की 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' घोषित करने जैसी क्रांतिकारी मांगें शामिल हैं।

Thu, 12 Feb 2026 11:23 AMAnubhav Shakya लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली-NCR में 500 से ऊपर AQI रीडिंग छिपाई जा रही? CAQM को भेजी गई 26 बड़ी सिफारिशें

दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना दूभर हो चुका है और अब जनता का गुस्सा सिस्टम पर फूट पड़ा है। क्या आपको पता है कि जब प्रदूषण का मीटर (AQI) 500 दिखाता है, तो असल में हवा उससे कहीं ज्यादा जहरीली हो सकती है? इसी 'छुपे हुए खतरे' को उजागर करने के लिए दिल्ली के लोगों और एनजीओ ने और एक्टिविस्ट्स ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को सुधारों की एक लंबी लिस्ट सौंपी है।

क्या है लोगों की मांग?

सबसे चौंकाने वाली मांग AQI मीटर को लेकर है। लोगों ने CAQM से कहा है कि AQI की रीडिंग को 500 पर कैप करना बंद किया जाए। मौजूदा सिस्टम में प्रदूषण चाहे कितना भी भयानक हो, मीटर 500 से ऊपर नहीं दिखाता। एक्टिविस्ट्स का कहना है कि यह असली गंभीरता को छिपाने जैसा है। हमें पता होना चाहिए कि हम कितना जहर सांस में ले रहे हैं।

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जब हवा जहरीली, तो मेट्रो-बस फ्री क्यों नहीं?

ईस्ट दिल्ली RWA जॉइंट फ्रंट ने सरकार के सामने एक प्रैक्टिकल सुझाव रखा है। उन्होंने मांग की है कि जिस दिन हवा ज्यादा खराब हो, उस दिन मेट्रो और बसों का सफर जनता के लिए मुफ्त कर दिया जाए। इसके साथ ही, ज्यादा ट्रैफिक वाले कोरिडोर्स पर कंजेशन प्राइसिंग लगाने का सुझाव दिया गया है, ताकि लोग निजी गाड़ियां कम निकालें।

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इमरजेंसी जैसी स्थिति

900 से ज्यादा पेरेंट्स और केयरगिवर्स के समूह वॉरियर मॉम्स ने दो टूक कहा है कि प्रदूषण सिर्फ सर्दियों की समस्या नहीं है। उन्होंने मांग की है कि प्रदूषण को साल भर की पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया जाए। पेड़ों की कटाई पर तुरंत रोक लगे और पटाखों पर साल भर बैन हो। सड़कों के गड्ढे समय पर भरे जाएं और धूल उड़ाने वाले ठेकेदारों पर भारी जुर्माना लगे।

Delhi Pollution

नोएडा के पर्यावरण एक्टिविस्ट अमित गुप्ता और अन्य समूहों ने NCAP फंड्स के इस्तेमाल में पारदर्शिता की मांग की है। सुझाव है कि एक पब्लिक डैशबोर्ड बनाया जाए, जहां दिखे कि कितना पैसा आया और कहां खर्च हुआ। जो अधिकारी काम नहीं कर रहे, उनकी जवाबदेही तय हो और उन पर FIR दर्ज की जाए।

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वो खतरा जो मापा ही नहीं जा रहा

सुझावों में एक डरावनी बात यह भी सामने आई है कि दिल्ली के मॉनिटरिंग स्टेशन अभी वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स को मापते ही नहीं हैं। यह एक अहम प्रदूषक है जो हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। मांग है कि इसे तुरंत ट्रैक करना शुरू किया जाए। CAQM के अधिकारियों ने कहा है कि वे इन सुझावों की जांच करेंगे और जो व्यावहारिक होंगे, उन्हें लागू करने की कोशिश करेंगे।

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