दिल्ली की जेलों में क्षमता से दोगुना कैदी, NCRB की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की रिपोर्ट में दिल्ली की जेलों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एनसीआरबी की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की जेलें देश में सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाली हैं। यहां एक कैदी के लिए उपलब्ध जगह में लगभग दो कैदी रखे गए हैं।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की रिपोर्ट में दिल्ली की जेलों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एनसीआरबी की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की जेलें देश में सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाली हैं। यहां एक कैदी के लिए उपलब्ध जगह में लगभग दो कैदी रखे गए हैं।
एनसीआरबी द्वारा जारी 'भारत के जेल आंकड़े-2024' के अनुसार, दिल्ली की जेलों में ऑक्यूपेंसी रेट 194.6 प्रतिशत था, जो देश में सबसे ज्यादा था। हालांकि 2023 में दर्ज 200 प्रतिशत के ऑक्यूपेंसी रेट से इसमें थोड़ा सुधार हुआ, फिर भी यह लिस्ट में सबसे ऊपर रहा। इसके बाद मेघालय (163.5 प्रतिशत), जम्मू-कश्मीर (148.3 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (147.1 प्रतिशत) और महाराष्ट्र (143.9 प्रतिशत) का स्थान रहा।
दिल्ली जेल विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि भीड़ की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने नरेला में एक नई जेल बनाने का काम पहले ही शुरू कर दिया है। प्रवक्ता ने कहा कि तीनों जेल परिसरों में कैदियों का बंटवारा भी बेहतर तरीके से किया गया है। हमने कैदियों की संख्या कम की है और तिहाड़ जेल पर पड़ने वाले बोझ को और कम करने पर काम कर रहे हैं।
दिल्ली में सबसे ज्यादा 14 सेंट्रल जेलें
2020 से आई रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में देश की सबसे ज्यादा 14 सेंट्रल जेलें हैं, फिर भी यहां भीड़ की समस्या सालों से बनी हुई है। एनसीआरबी के मुताबिक, कोविड-19 महामारी के चरम पर भी दिल्ली की जेलों में उनकी क्षमता से दोगुनी से ज्यादा कैदी थे। रिपोर्ट में इसकी वजह दिल्ली में विचाराधीन कैदियों की बड़ी संख्या (17178) को बताया गया है।
जेलों की कुल क्षमता 10026 कैदियों की
कुल मिलाकर तिहाड़, मंडोली और रोहिणी में तीन जेल परिसर हैं, जिनमें कुल 16 जेलें शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी जेलों की कुल क्षमता 10026 कैदियों की है, लेकिन 2024 में इनमें कैदियों की संख्या 19512 थी। इनमें से 2232 कैदी दोषी करार दिए जा चुके हैं। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा दोषी रेप और हत्या के मामलों में जेल में बंद हैं।
नरेला में दिल्ली की पहली हाई-सिक्योरिटी जेल
दिल्ली सरकार ने नरेला में दिल्ली की पहली हाई-सिक्योरिटी जेल बनाने का टेंडर दे दिया है। दिल्ली जेल अधिकारियों ने बताया कि यह अत्याधुनिक सुविधा हाई-रिस्क वाले कैदियों को अलग-अलग कोठरियों में रखने के लिए डिजाइन की गई है। इससे राष्ट्रीय राजधानी की जेलों में लंबे समय से चली आ रही भीड़ की समस्या का समाधान हो सकेगा।
जेल स्टाफ के 4069 पद खाली
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 95 प्रतिशत से ज्यादा कैदी पुरुष थे। रिपोर्ट के अनुसार, 9346 कैदियों की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले जेल में 18758 पुरुष कैदी मौजूद थे। ऑक्यूपेंसी रेट लगभग दोगुना होने के बावजूद रिपोर्ट में बताया गया है कि जेल स्टाफ की खाली जगहों के मामले में दिल्ली तीसरे स्थान पर है। यहां 4069 पद खाली हैं। यह केवल बिहार (4593) और उत्तर प्रदेश (4278) से पीछे है।
6512 स्टाफ के मुकाबले सिर्फ 2447
ज्यादातर खाली पद एग्जीक्यूटिव स्टाफ और हेड वार्डन के हैं। एग्जीक्यूटिव स्टाफ के पदों में 3782 की कमी बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, हेड वार्डन के 1372 स्वीकृत पदों के मुकाबले दिल्ली में सिर्फ 272 हेड वार्डन थे। कुल मिलाकर दिल्ली की जेलों में 6512 स्टाफ की जरूरत के मुकाबले सिर्फ 2447 स्टाफ थे। स्टाफ की कमी के बारे में पूछे गए सवाल पर दिल्ली जेल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वे राजधानी की जेलों में और ज्यादा स्टाफ तैनात करने की मांग कर रहे हैं। यह मामला राज्य सरकार के विचाराधीन है।




साइन इन