सुकेश की याचिका खारिज, 200 करोड़ की उगाही केस में नहीं मिली राहत; दिल्ली HC ने क्या कहा?
पिछले सप्ताह हुई सुनवाई में अदालत ने मकोका के तहत जबरन वसूली के मामले व धनशोधन मामले में सुकेश चंद्रशेखर व दूसरे आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया था। अदालत ने आरोप तय करने पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को दो सौ करोड़ रुपये की कथित जबरन वसूली के मामले में सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। पिछले सप्ताह हुई सुनवाई में अदालत ने मकोका के तहत जबरन वसूली के मामले व धनशोधन मामले में सुकेश चंद्रशेखर व दूसरे आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया था।
चंद्रशेखर ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि जब तक दिल्ली पुलिस नवास कक्कट की गिरफ्तारी के बाद आरोपपत्र दाखिल नहीं कर देती, तब तक सत्र अदालत को इस मामले में आरोप तय न करने का निर्देश दिया जाए। याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि याचिका बेकार हो गई है क्योंकि आरोप पहले ही तय हो चुके हैं। दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई की कोई जल्दी नहीं है। इसे 8 जुलाई को संबंधित पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
वकील अनंत मलिक ने अदालत से आरोपपत्र पर हस्ताक्षर करने पर रोक लगाने की अपील की है। पीठ ने रोक लगाने से मना करते हुए कहा कि आरोपी के पास हमेशा यह विकल्प होता है कि किसी भी आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सके। लेकिन इस मामले में अब तत्काल सुनवाई की जरुरत नहीं है।
ज्ञात रहे कि पटियाला हाउस अदालत ने 30 मई को सुकेश चंद्रशेखर, लीना मारिया पॉल व अन्य के खिलाफ दो सौ करोड़ रुपये की कथित जबरन वसूली से जुड़े महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम(मकोका) मामले में आरोप तय करने का निर्देश दिया था। जैकलीन जबरन वसूली मामले में आरोपी नहीं हैं। सत्र अदालत ने आरोपपत्र पर औपचारिक हस्ताक्षर के लिए मामले को 3 जून को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। आरोपियों को दोपहर 2 बजे अदालत उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। में फिजिकली पेश होने का निर्देश दिया गया है।




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