10 दिन के भीतर फीस रेगुलेशन कमेटी बनाएं स्कूल, दिल्ली सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया
दिल्ली सरकार ने दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट को लागू करने के लिए एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों के लिए नए फीस तय करने वाले कानून पर सवाल उठाने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।

दिल्ली सरकार ने दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट को लागू करने के लिए एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों के लिए नए फीस तय करने वाले कानून पर सवाल उठाने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।
रविवार को जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार हर स्कूल को आदेश जारी होने के 10 दिनों के अंदर स्कूल-लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (SLFRC) बनाने का निर्देश दिया गया है। पहले के नोटिफिकेशन के तहत बनी कमेटियों को नई व्यवस्था के तहत मान्य माना जाएगा।
गजट में आगे कहा गया है कि स्कूल मैनेजमेंट को SLFRC बनने के 14 दिनों के अंदर 2026-27 से शुरू होने वाले अगले तीन एकेडमिक सालों के लिए प्रस्तावित फीस स्ट्रक्चर की डिटेल्स जमा करनी होंगी। इसके बाद कमेटी एक्ट के प्रावधानों के अनुसार फीस तय करेगी।
इसमें यह भी कहा गया है कि शिक्षा निदेशक को फीस तय करने से संबंधित अपीलों की सुनवाई के लिए 30 दिनों के अंदर हर शिक्षा जिले में जिला फीस अपीलीय समितियां बनाने का निर्देश दिया गया है। नोटिफिकेशन में साफ किया गया है कि रिवाइज्ड टाइमलाइन सिर्फ 2026-27 से शुरू होने वाले अगले तीन एकेडमिक सालों के ब्लॉक पर लागू होंगी और एक्ट और नियमों में तय की गई सख्त टाइमलाइन सभी आने वाले ब्लॉक के लिए फॉलो की जाएंगी।
माता-पिता के लिए एक अहम अंतरिम राहत में गजट में कहा गया है कि स्कूलों को 1 अप्रैल 2025 तक ली जा रही फीस से ज्यादा कोई भी रकम लेने की इजाज़त नहीं होगी, जब तक कि आने वाले ब्लॉक के लिए नया फीस स्ट्रक्चर तय नहीं हो जाता।
इसमें यह भी कहा गया है कि 2025-26 एकेडमिक ईयर के लिए स्कूलों द्वारा ली जाने वाली किसी भी ज्यादा फीस को कानून के हिसाब से रेगुलेट किया जाएगा, जो दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग मामलों के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
दो फीस साइकल के बीच के ट्रांज़िशन पीरियड के बारे में गजट में यह भी कहा गया है कि एक बार तीन साल का फीस ब्लॉक खत्म होने के बाद स्कूल अगली ब्लॉक की फीस आधिकारिक तौर पर मंजूर होने तक पिछली तय रकम से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकते हैं। इस बीच जो भी ज्यादा फीस ली गई है, उसे बाद में एडजस्ट करना होगा।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सुप्रीम कोर्ट हाल ही में दिल्ली सरकार के फीस रेगुलेशन फ्रेमवर्क की वैधता की जांच कर रहा है। कोर्ट ने कानून के कई प्रावधानों पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिसमें कमेटियों का स्ट्रक्चर और मनमानी फीस बढ़ोतरी के खिलाफ सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा एक्ट को लागू करने में समय-सीमा और प्रशासनिक दिक्कतों को लेकर उठाई गई चिंताओं पर भी ध्यान दिया था। दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस तय करने और रेगुलेट करने में पारदर्शिता) बिल 2025 में दिल्ली विधानसभा में पास किया गया था, जिसका मकसद स्कूल फीस तय करने में ज्यादा पारदर्शिता लाना, माता-पिता की भागीदारी बढ़ाना और मनमानी बढ़ोतरी को रोकना था।




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