दिल्ली में तुर्कमान गेट पथराव मामले में 12 आरोपियों को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी जमानत
आरोप है कि करीब 150 से 200 लोगों की भीड़ ने पुलिस और निगम कर्मियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकीं थी। जिससे इस घटना में क्षेत्र के थाना प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पत्थरबाजी करने के मामले में तीस हजारी अदालत ने मंगलवार को सभी 12 आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें जमानत दे दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भूपिंदर सिंह की अदालत ने प्रत्येक आरोपी को 50-50 हजार रुपए के जमानती बांड पर रिहा करने का आदेश दिया है। यह घटना पिछले महीने तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास प्रशासन द्वारा चलाए गए तोड़फोड़ अभियान के दौरान हुई थी। जब कुछ लोगों ने वहां हो रही कार्रवाई को मस्जिद गिराने की कार्रवाई बताते हुए उसका विरोध किया था और पत्थरबाजी की थी।
आरोपी जिन्हें कोर्ट से मिली जमानत
अदालत ने जिन आरोपियों को जमानत दी, उनके नाम मोहम्मद कैफ, मोहम्मद काशिफ, मोहम्मद उबैदुल्लाह, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद अदनान, समीर हुसैन, मोहम्मद नावेद, मोहम्मद अतहर, मोहम्मद अरीब, मोहम्मद आदिल, आमिर हमजा और अदनान हैं।
12 फरवरी को सुरक्षित रख लिया था जमानत पर फैसला
इससे पहले गुरुवार, 12 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। उस दिन हुई सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकील ने आरोपियों में से एक के फोन पर पाए गए भड़काऊ संदेशों का जिक्र करते हुए दलील दी थी कि उनके मुवक्किल ने केवल संदेशों को आगे भेजा था, लेकिन उसने क्लिप या संदेशों को तैयार नहीं किया था।
वकील ने लगाया कहानी में हेरफेर करने का आरोप
आरोपियों के वकील ने यह भी आरोप लगाया कि अभियोजन ने बाद में कहानी में हेरफेर किया क्योंकि भड़काऊ संदेश FIR में कभी शामिल नहीं किए गए, जबकि पुलिस के पास उनके उपकरण काफी समय तक थे। हालांकि अतिरिक्त लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने बचाव पक्ष के वकील द्वारा आरोपी को सिर्फ एक संदेश भेजने के लिए बरी करने के संबंध में प्रस्तुत दलीलों का खंडन किया था और कहा था कि आपराधिक साजिश और आश्रय देने में स्पष्ट अंतर है।
वकील ने कहा- इमरान तो सामान लेने निकला था
मोहम्मद इमरान के बचाव में वकील ने तर्क दिया कि घटना के समय वह अपने घर से बाजार के लिए निकला था और बाजार से हाथों में बैग लेकर थोड़े अंतराल के बाद वापस आने का सीसीटीवी सबूत है। उन्होंने कहा, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वह उस समय घटना स्थल पर पत्थर फेंक रहा था।
यह है पूरा मामला
यह मामला छह और सात जनवरी की दरम्यानी रात फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई गई थी कि तुर्कमान गेट के सामने स्थित मस्जिद को तोड़ा जा रहा है, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर इकट्ठा हो गए थे।
आरोप है कि करीब 150 से 200 लोगों की भीड़ ने पुलिस और निगम कर्मियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकीं थी। जिससे इस घटना में क्षेत्र के थाना प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
24 जनवरी को मिली थी एक आरोपी को जमानत
बता दें कि 24 जनवरी को एक अन्य सत्र अदालत ने आरोपी उबैदुल्लाह को जमानत दी थी, जबकि उससे पहले 20 जनवरी को हाईकोर्ट ने उसकी पहली जमानत रद्द कर मामले को दोबारा सत्र अदालत में सुनवाई के लिए भेजा था।




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