तुर्कमान गेट में फैज इलाही मस्जिद के पास क्यों चलाया बुलडोजर? MCD ने बताई पूरी बात
तुर्कमान गेट में सैयद फैज इलाही मस्जिद के पास क्यों चलाया गया बुलडोजर? एमसीडी प्रशासन ने बुधवार को अपने ऐक्शन के पक्ष में तथ्यों के साथ पूरी बात बताई। एमसीडी ने क्या तथ्य रखें? इस रिपोर्ट में जानें…

दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी प्रशासन ने तुर्कमान गेट में सैयद फैज इलाही मस्जिद के पास क्यों चलाया बुलडोजर उसके पक्ष में तथ्यों के साथ पूरी बात बताई। निगम प्रशासन ने बुधवार को जारी बयान में स्पष्ट किया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई को करने से पहले दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के तहत मस्जिद की प्रबंध समिति व अन्यों प्रभावित पक्षों के साथ सुनवाई भी की गई। इसके बाद बुधवार को अवैध ढांचे व अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की गई।
डीडीए के समन्वय के साथ रामलीला ग्राउंड पर सर्वेक्षण किया
निगम प्रशासन ने बताया कि एमसीडी, भूमि एवं विकास कार्यालय (एल एंड डीओ), भारत सरकार के अधीन रामलीला ग्राउंड का लाइसेंसी है। एक शिकायत के आधार पर एमसीडी द्वारा एल एंड डीओ व डीडीए के अधिकारियों के समन्वय से रामलीला ग्राउंड में अतिक्रमण का सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण में यह पाया गया कि लगभग 36,428 वर्ग फुट क्षेत्रफल पर रामलीला ग्राउंड में एक बैंक्वेट हॉल व अन्य व्यावसायिक गतिविधियों, जिनमें एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर भी शामिल है। बैंक्वेट हॉल व निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के माध्यम से इस स्थान पर अतिक्रमण किया गया था। सर्वेक्षण में सड़क व फुटपाथ पर अतिक्रमण होना भी पाया गया था।
12 नवंबर को न्यायालय ने आदेश पारित किया
निगम प्रशासन ने कहा कि इसी बीच, रामलीला ग्राउंड से लगभग 36,428 वर्ग फुट क्षेत्रफल में अतिक्रमण हटाने के संबंध में एक संगठन द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई थी। इस मामले पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बीते वर्ष 12 नवंबर को आदेश पारित करते हुए एमसीडी को निर्देशित किया कि वह संयुक्त सर्वेक्षण रिपोर्ट में उल्लिखित अतिक्रमण व अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को हटाने के लिए प्रभावित पक्षों व व्यक्तियों को सुनवाई का अवसर प्रदान करें। इसके मद्देनजर आदेश की तिथि से तीन महीने की अवधि के अंदर उपयुक्त कार्रवाई करें।
दो बार निगम ने प्रभावित पक्षों से व्यक्तिगत सुनवाई की
निगम प्रशासन ने बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में एमसीडी की तरफ से प्रभावित पक्षों को बीते वर्ष 24 नवंबर और 16 दिसंबर को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया। उक्त सुनवाई में सैयद फैज इलाही मस्जिद की प्रबंध समिति, दिल्ली वक्फ बोर्ड, डीडीए, एल एंड डीओ और राजस्व विभाग, दिल्ली सरकार के अधिकारी व प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
निगम ने 22 दिसंबर को पारित किया गया
निगम प्रशासन ने बताया कि प्रभावित पक्षों से सुनवाई के दौरान प्रस्तुत अभिलेखों व बयानों पर सावधानी पूर्वक विचार करने के उपरांत एमसीडी की तरफ से दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में 22 दिसंबर को आदेश पारित किया गया। सुनवाई व प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि वर्ष 1940 में एल एंड डीओ द्वारा सिर्फ 0.195 एकड़ भूमि के लिए पट्टा विलेख निष्पादित किया गया था। जिसमें एक टिन शेड, चबूतरा, हुजरा व कब्रिस्तान स्थित थे। दिल्ली वक्फ बोर्ड अथवा सैयद फैज इलाही मस्जिद प्रबंधन समिति द्वारा उक्त पट्टा विलेख में सम्मिलित भूमि से अधिक किसी भी प्रकार के स्वामित्व व अधिकार से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।
7 जनवरी को कार्रवाई की गई
निगम प्रशासन ने बताया कि इस मामले पर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 12 नवंबर को आदेश पारित किया गया। इसके बाद एमसीडी ने प्रभावित पक्षों से सुनवाई की और उसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए 22 दिसंबर को अतिक्रमण किए गए ढांचे को ध्वस्त करने का फैसला लिया। फैसला लेने के बाद निगम ने कार्रवाई का आदेश दिया। दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के तहत बुधवार 7 जनवरी को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के दौरान पट्टा विलेख में सम्मिलित 0.195 एकड़ भूमि क्षेत्र को छोड़ते हुए शेष अतिक्रमण को हटा दिया गया।




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