दिल्ली में 1,511 अवैध कॉलोनियों को वैध करने की तैयारी, पोर्टल पर काम; आगे क्या?
दिल्ली नगर निगम 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के लिए सरल स्वगम पोर्टल तैयार कर रहा है। ड्रोन सर्वेक्षण का डेटा इसमें जोड़ा जाएगा। इससे निवासी आसानी से आवेदन कर सकेंगे।

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के लिए स्वगम पोर्टल को अंतिम रूप देने की ओर कदम बढ़ा दिया है। 50 फीसदी से अधिक कॉलोनियों का ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जिसका डेटा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। पोर्टल को बैंकिंग ऐप्स की तरह सरल बनाया गया है ताकि आम लोग आसानी से आवेदन कर सकें। नियमों के तहत, उचित अतिरिक्त क्षेत्रफल सीमा (एफएआर) से अधिक निर्माण पर 3 गुना जुर्माना लगेगा। अधिकारियों के अनुसार, पीएम-उदय योजना के तहत स्वामित्व अधिकार और नियमितीकरण की प्रक्रिया एक महीने में शुरू होने की उम्मीद है।
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि एमसीडी 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। इस बीच नगर निगम के स्वगम पोर्टल का सरकारी मुख्य पोर्टल के साथ एकीकरण के लिए प्रदर्शन परीक्षण किया गया है। इसे जनता के उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है।
50 फीसदी से अधिक ड्रोन सर्वे पूरा
चिह्नित कॉलोनियों में 50 फीसदी से अधिक ड्रोन सर्वेक्षण पहले ही पूरे हो चुके हैं। ये ड्रोन सर्वेक्षण संरचनाओं, सड़क नेटवर्क और संपत्ति की भौगोलिक सीमा निर्धारण के लिए एक आधार तैयार करते हैं। सर्वे से प्राप्त आंकड़ों को पोर्टल में शामिल किया जाएगा। इससे निवासियों को अपनी संपत्ति के नियमितीकरण के लिए आवेदन करने में सुविधा होगी।
बैंकिंग ऐप्स की तरह आसान बनाया गया पोर्टल
पोर्टल को तकनीकी उलझनों से बचाने के लिए बैंकिंग ऐप्स की तरह आसान बनाया गया है ताकि आवेदक इसे बिना किसी भ्रम के इस्तेमाल कर सकें। एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पोर्टल को जोड़ने का काम फिलहाल जारी है। हमने शुक्रवार को एक प्रदर्शन किया और भाषा को सरल बनाने के लिए कुछ बदलाव किए ताकि एक आम आदमी भी प्रक्रिया में शामिल क्षेत्रों और अपने आवेदनों के निहितार्थों को आसानी से समझ सके।
एफएआर से अधिक निर्माण पर जुर्माना
अधिकारियों ने कहा कि इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण प्रावधान फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) से संबंधित है। दिल्ली के मास्टर प्लान के तहत उचित अतिरिक्त क्षेत्रफल सीमा (एफएआर) से अधिक किसी भी निर्माण पर सामान्य अतिरिक्त एफएआर शुल्क से 3 गुना अधिक जुर्माना लगाया जाएगा।
रेगुलराइजेशन के लिए एक समान शुल्क नहीं
अधिकारियों ने साफ किया कि प्रॉपर्टी के रेगुलराइजेशन के लिए कोई एक समान शुल्क नहीं है। कई घटक इसमें शामिल किए गए हैं। इनमें आवेदन शुल्क और जांच शुल्क शामिल हैं। उदाहरण के लिए जांच शुल्क 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। इसलिए, 1,000 वर्ग मीटर के निर्मित क्षेत्र के लिए शुल्क 10,000 रुपये होगा।
एक महीने के भीतर कार्रवाई का अनुमान
MCD के एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि पीएम-उदय योजना के तहत जिन लोगों को अभी तक मालिकाना हक नहीं मिला है उन्हें एक महीने में यह मिल सकता है। इसके बाद MCD कॉलोनियों को नियमित करने के आवेदनों पर भी एक महीने के भीतर कार्रवाई शुरू कर देगी।




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