DDA अब मेट्रो लाइन के पास बनाएगा नए मकान-दुकान? TOD योजना के लिए इन जगहों पर 14 प्लॉट की पहचान
डीडीए ने दिल्ली मेट्रो कॉरिडोर के साथ-साथ लगे 14 जमीन के टुकड़ों की पहचान ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के लिए की है। इस योजना का मकसद पब्लिक ट्रांसपोर्ट हब के पास मिक्स्ड-यूज और भीड़भाड़ वाले इलाकों का विकास करना है।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) पॉलिसी पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। डीडीए ने राजधानी में दिल्ली मेट्रो के अलग-अलग कॉरिडोर के साथ लगे 14 प्लॉटों की पहचान टीओडी के लिए की है। इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि इन प्लॉटों की पहचान जमीन की उपलब्धता के शुरुआती आकलन के बाद की गई है। इसका मकसद पब्लिक ट्रांसपोर्ट हब के पास मिक्स्ड-यूज और अधिक आबादी वाले इलाकों में विकास को बढ़ावा देना है। अधिकारियों के मुताबिक, पहचाने गए ये सभी प्लॉट मिलाकर 300,000 वर्ग मीटर से अधिक जगह में फैले हुए हैं।
एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, TOD साइटें मिक्स्ड-यूज वाले शहरी क्षेत्र हैं, जो सीधे बड़े पब्लिक ट्रांजिट हब के आस-पास या उनसे सटे हुए बनाए जाते हैं। इनमें मकान, ऑफिस और रिटेल शॉप शामिल होती हैं।
कहां-कहां हुई जमीन की पहचान
डीडीए द्वारा पहचाने गए सबसे बड़े प्लॉटों में से एक ईस्ट दिल्ली के कड़कड़डूमा में कैलाश दीपक अस्पताल के पीछे है, जो एक तिकोना प्लॉट है। यह प्लॉट ब्लू लाइन कॉरिडोर के साथ-साथ 76,251 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। एक और जमीन ग्रीन लाइन के साथ-साथ पीरागढ़ी डिस्ट्रिक्ट सेंटर के पास है, जिसका क्षेत्रफल 124,828 वर्ग मीटर है।
डीडीए ने द्वारका में ब्लू लाइन के किनारे सेक्टर 10 और 12 में जमीन के कई टुकड़ों की पहचान की है। इनमें सेक्टर 12 में 31,100 वर्ग मीटर की एक डिस्ट्रिक्ट सेंटर साइट और 26,400 वर्ग मीटर का एक डिस्ट्रिक्ट सेंटर शामिल है।
वहीं रोहिणी में येलो लाइन कॉरिडोर के किनारे सेक्टर 19 और 18 में दो रिहायशी ग्रुप हाउसिंग प्लॉट भी इस लिस्ट में शामिल किए गए हैं। इन दोनों प्लॉटों का साइज 14,600 वर्ग मीटर और 18,500 वर्ग मीटर है। पहचाने गए अन्य प्लॉटों में झिलमिल ताहिरपुर-शाहदरा, मादीपुर, मंडावली और प्रीत विहार के प्लॉट शामिल हैं।
एलजी ने प्लॉटों की जानकारी पोर्टल पर डालने को कहा
डीडीए के चेयरमैन और दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा, “इन प्लॉटों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं, ताकि इच्छुक डेवलपर सहयोग के अवसरों की तलाश कर सकें।”
केंद्र ने पिछले महीने की थी टीओडी पॉलिसी की घोषणा
भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, बीते 7 महीने अप्रैल को केंद्र सरकार ने दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन और निर्माण गतिविधियों के लिए अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु संशोधित "जैसा है जहां है" आधारित संशोधित नियमितीकरण नीति की घोषणा की थी। नीति के तहत दिल्ली की कुल 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1,511 कॉलोनियों में पहले से निर्मित मकानों के रजिस्ट्रेशन के लिए एक 'लेआउट प्लान' की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा अब डीडीए के बजाय दिल्ली सरकार का राजस्व विभाग स्वामित्व विलेख जारी करेगा। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया था कि केंद्र सरकार ने स्वामित्व अधिकार और भवन नियमितीकरण दोनों प्रक्रियाओं को सरल बनाकर 'जैसा है जहां है' के आधार पर अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण के अलावा राजधानी के लिए टीओडी पॉलिसी भी शुरू की है।




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