सिर्फ एक पुलिसवाले की गवाही पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं; अदालत ने दिल्ली दंगे के आरोपी को किया बरी
फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा, इन विरोधाभासों के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, साथ ही कहा कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपना केस साबित करने में विफल रहा है। इसलिए, कोर्ट ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

दिल्ली की एक अदालत ने साल 2020 में दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में दंगा और आगजनी के आरोपी व्यक्ति को बड़ी राहत देते हुए उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष के केस में गंभीर खामियों का हवाला दिया और कहा कि सिर्फ एक गवाह की गवाही पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं होगा। जिसके बाद एडिशनल सेशंस जज परवीन सिंह की अदालत ने आरोपी फैजान उर्फ आर्यन को संदेह का लाभ देते हुए उसे राहत दे दी और आरोपों से मुक्त कर दिया।
'आरोपी को संदेह का लाभ मिलना चाहिए'
फैजान पर साल 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान बृजपुरी रोड पर स्थित अरुण मॉडर्न पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आग लगाने का आरोप था। इस मामले में 28 जनवरी को पारित आदेश में जज ने कहा, 'अदालत के सामने रखे गए तथ्यों और परिस्थितियों को देखने के बाद अदालत को लगता है कि प्रॉसिक्यूशन के अकेले गवाह (PW2 कांस्टेबल पीयूष) की गवाही पर भरोसा करना बहुत असुरक्षित होगा। ऐसे में अभियोजन पक्ष सभी उचित संदेहों से परे अपना केस साबित करने में विफल रहा है और आरोपी संदेह का लाभ पाने का हकदार है।'
आगजनी में हुआ था 1 करोड़ का नुकसान
फैजान पर उस दंगाई भीड़ का हिस्सा होने का आरोप था, जिसने कथित तौर पर 25 फरवरी, 2020 को स्कूल में तोड़फोड़ की थी और आग लगा दी थी, इस घटना में 1 करोड़ रुपए से ज़्यादा का नुकसान हुआ था। अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि घटना वाले दिन लगभग 200 लोगों की भीड़ जबरन स्कूल परिसर में घुस आई थी, और आते ही उन्होंने वहां रखी संपत्तियों और वहां खड़े वाहनों को नष्ट करते हुए इमारत में आग लगा दी थी।
कोर्ट ने कहा- केस सिर्फ पुलिसवाले की गवाही पर आधारित
कोर्ट ने कहा कि फैजान के खिलाफ केस पूरी तरह से एक पुलिस गवाह की गवाही पर आधारित है, जिसने कथित तौर पर उसे दंगाई भीड़ के हिस्से के रूप में पहचाना था। जज ने कहा, 'यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इस गवाह ने कोर्ट के सामने दर्ज अपनी दो गवाहियों में विरोधाभासी बयान दिए हैं।' सुनवाई के दौरान कोर्ट ने FIR दर्ज करने में की गई बिना वजह की देरी और जांच एजेंसी द्वारा मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों से पूछताछ न करने पर भी ध्यान दिया।
कोर्ट ने कहा, इन विरोधाभासों के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, साथ ही कहा कि प्रॉसिक्यूशन उचित संदेह से परे अपना केस साबित करने में विफल रहा है। इसलिए, कोर्ट ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
इस मामले की शुरुआत में फैजान सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जिनमें से दो सह-आरोपियों को फरवरी 2025 में बरी कर दिया गया था। इसी दौरान फैजान फरार हो गया था। जिसके बाद उसके फरार होने के बाद साल 2022 में घोषित अपराधी फैजान को अगस्त 2025 में दोबारा गिरफ्तार किया गया था और उस पर अलग से मुकदमा चलाया गया।




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